Indian Expatriates Security : खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के लिए फिक्रमंद केरल सरकार; पीएम मोदी से तत्काल मदद की गुहार

Indian Expatriates Security/तिरुवनंतपुरम: केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रह रहे भारतीय नागरिकों, विशेषकर मलयाली प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हाल की कुछ घटनाओं के मद्देनजर, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की है।

प्रवासियों की सुरक्षा पर गहरी चिंता

मुख्यमंत्री विजयन ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि खाड़ी देश भारत, और विशेष रूप से केरल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लाखों भारतीय इन देशों में कार्यरत हैं और वहां की अस्थिरता का सीधा असर उनके परिवारों और भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया:

“खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वहां रह रहे भारतीयों के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। भारत सरकार को अपने राजनयिक चैनलों का उपयोग कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”

मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव रखे हैं:

राजनयिक हस्तक्षेप: भारतीय दूतावासों को और अधिक सक्रिय किया जाए ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में प्रवासियों की तत्काल मदद कर सकें।

आपातकालीन निकासी योजना: यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं, तो नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए एक विस्तृत ‘निकासी ब्लूप्रिंट’ तैयार रखा जाना चाहिए।

हेल्पलाइन डेस्क की स्थापना: खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों और भारत में उनके चिंतित परिजनों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए 24/7 समर्पित हेल्पलाइन शुरू की जाए।

रोजगार सुरक्षा: युद्ध या तनाव के कारण यदि किसी की नौकरी छूटती है तो केंद्र सरकार को उनके पुनर्वास और वित्तीय सुरक्षा के लिए योजना बनानी चाहिए।

केरल की अर्थव्यवस्था और प्रवासियों का योगदान

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि केरल की जीडीपी में प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) का बहुत बड़ा योगदान है। खाड़ी देशों में किसी भी प्रकार का संकट केरल के हजारों घरों के चूल्हे ठंडे कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मानवीय चिंता का विषय है।

केंद्र से ठोस कार्रवाई की उम्मीद

पिनाराई विजयन ने विश्वास व्यक्त किया कि विदेश मंत्रालय (MEA) और प्रधानमंत्री कार्यालय इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को स्वयं खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात करनी चाहिए ताकि वहां रह रहे भारतीय कार्यबल को यह भरोसा मिल सके कि उनका देश उनके साथ खड़ा है।

भविष्य की रणनीति

केरल सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर केंद्र के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। राज्य का ‘नोर्का’ (NORKA) विभाग पहले से ही विदेशों में रह रहे केरलवासियों के संपर्क में है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र की भूमिका अनिवार्य है।मुख्यमंत्री के इस पत्र ने एक बार फिर प्रवासियों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम और विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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