Code developers/मुंबई:-भारत के तेजी से बढ़ते टेक ईकोसिस्टम के लिए पिछला हफ्ता काफी तनावपूर्ण रहा है। भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत एक आदेश जारी करते हुए लोकप्रिय बैकएंड-एज़-ए-सर्विस (BaaS) प्लेटफॉर्म सुपाबेस (supabase.co) को ब्लॉक कर दिया है। 24 फरवरी 2026 से प्रभावी हुए इस आदेश के बाद देश के हजारों डेवलपर्स और सैकड़ों उभरते हुए स्टार्टअप्स के ऐप्स और वेबसाइट्स ठप हो गए हैं।
क्या है सुपाबेस और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?
सुपाबेस को गूगल के ‘फायरबेस’ (Firebase) के एक ओपन-सोर्स विकल्प के रूप में देखा जाता है। यह डेवलपर्स को निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करता है:
रियल-टाइम डेटाबेस: ऐप्स के लिए तुरंत डेटा अपडेट करना।
ऑथेंटिकेशन: यूजर लॉगिन और सुरक्षा की व्यवस्था।
क्लाउड स्टोरेज: फाइलों और इमेज को स्टोर करना।
चूंकि कई भारतीय स्टार्टअप्स का पूरा ढांचा (Infrastructure) सुपाबेस पर टिका है, इस प्रतिबंध के कारण उनके ‘लिव’ (Live) प्रोडक्शन ऐप्स ने काम करना बंद कर दिया है, जिससे सीधे तौर पर अंतिम उपभोक्ता (End-user) प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध? (ताजा अपडेट्स)
हालांकि सरकार ने अभी तक किसी विशिष्ट कारण का खुलासा नहीं किया है लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार:
सुरक्षा चिंताएं: एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि प्लेटफॉर्म पर “ऐसी जानकारी साझा की जा रही थी जिसे साझा नहीं किया जाना चाहिए था।”
डीएनएस (DNS) पॉइजनिंग: रिलायंस जियो, एयरटेल और एक्ट फाइबरनेट जैसे प्रमुख इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) ने सरकार के निर्देश पर ‘डीएनएस लेवल’ पर वेबसाइट को ब्लॉक किया है।
धारा 69A का उपयोग: यह धारा सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या संप्रभुता के हित में ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने की शक्ति देती है।
डेवलपर्स और स्टार्टअप्स में अफरातफरी
इस अचानक आए ब्लॉक के कारण भारतीय आईटी जगत में काफी गुस्सा और चिंता देखी जा रही है।
सुपाबेस की प्रतिक्रिया: कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। कंपनी ने कहा है कि उनका बुनियादी ढांचा वैश्विक स्तर पर पूरी तरह ठीक काम कर रहा है, केवल भारत में इसे बाधित किया गया है।
कामचलाऊ समाधान (Workarounds): वर्तमान में डेवलपर्स को VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) इस्तेमाल करने या अपने DNS सेटिंग्स को गूगल (8.8.8.8) या क्लाउडफ्लेयर (1.1.1.1) पर बदलने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, बड़े प्रोडक्शन एप्स के लिए यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
डिजिटल संप्रभुता बनाम सुगमता
नीति विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत की डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) को मजबूत करने की दिशा में हो सकता है, जहाँ सरकार चाहती है कि महत्वपूर्ण डेटा भारतीय या अधिक विनियमित (Regulated) प्लेटफॉर्म्स पर रहे। हालांकि, बिना पूर्व सूचना के इस तरह के प्रतिबंध से भारत की “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” (Ease of Doing Business) छवि को नुकसान पहुँच सकता है।