Assembly election : वीसीके (VCK) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सामने रखी 12 सीटों की मांग, गठबंधन में बढ़ी हलचल

Assembly election /चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके के साथ अपनी पहली बैठक में, दलित-केंद्रित पार्टी विदुथलाई चिरुथैगल कात्ची (VCK) ने अपनी ताकत का हवाला देते हुए कम से कम 12 सीटों की मांग की है।

शुरुआती बातचीत और वीसीके का रुख

सोमवार को डीएमके की सीट-बंटवारा समिति के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वीसीके प्रमुख और सांसद थोल थिरुमावलवन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी गठबंधन का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा, “हमने अपनी पार्टी की ताकत और गठबंधन में हमारे योगदान के आधार पर सीटों की मांग की है। 2026 का चुनाव केवल एक सामान्य चुनाव नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु में दक्षिणपंथी ताकतों को पैर जमाने से रोकने और सामाजिक न्याय की जीत सुनिश्चित करने की लड़ाई है।” सूत्रों के अनुसार वीसीके ने 12 विधानसभा सीटों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी 3 सीटों (एक सामान्य और दो आरक्षित) की मांग रखी है। हालांकि पार्टी ने फिलहाल राज्यसभा की किसी सीट के लिए दावेदारी नहीं की है।

द्रमुक के सामने ‘सीटों का गणित’ और चुनौतियां

डीएमके के लिए इस बार सीटों का बंटवारा आसान नहीं रहने वाला है। 2021 के चुनावों में वीसीके को केवल 6 सीटें दी गई थीं जिनमें से उसने 4 पर जीत दर्ज की थी। अब पार्टी अपनी बढ़ती लोकप्रियता और कैडर के दबाव के कारण इस संख्या को दोगुना करना चाहती है। दूसरी ओर डीएमके पर अन्य सहयोगियों का भी भारी दबाव है:

कांग्रेस: दिल्ली आलाकमान के निर्देश पर तमिलनाडु कांग्रेस 40 से अधिक सीटों की मांग कर रही है।

नए सहयोगी: अभिनेता कमल हासन की ‘मक्कल निधि मय्यम’ (MNM) और हाल ही में गठबंधन में शामिल हुई ‘DMDK’ को भी जगह देनी है।

विजय की एंट्री: सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कड़गम’ (TVK) के चुनावी मैदान में आने से समीकरण बदल गए हैं, जिससे डीएमके अपने सहयोगियों को कम सीटें देकर खुद ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है।

सामाजिक न्याय और गठबंधन की एकता

थिरुमावलवन ने विश्वास जताया कि सीटों की संख्या को लेकर वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन गठबंधन अटूट रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे डीएमके के साथ किसी भी तरह की “सौदेबाजी” (Bargaining) में विश्वास नहीं रखते, बल्कि जीत की संभावनाओं के आधार पर फैसला चाहते हैं। डीएमके की समिति अब इन मांगों को पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के सामने रखेगी।

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