नई दिल्ली :- सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा नए आधार वर्ष 2022 23 पर आधारित जीडीपी के ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने संशोधित पद्धति के बाद भी मजबूत विकास दर बनाए रखी है। सचिव सौरभ गर्ग के अनुसार वर्ष 2023 24 से 2025 26 के बीच औसत वास्तविक जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत से अधिक रही है जबकि इसी अवधि में नाममात्र जीडीपी वृद्धि नौ प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025 26 के दूसरे अग्रिम अनुमान बताते हैं कि वास्तविक जीडीपी में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि नाममात्र जीडीपी लगभग 8.6 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
नए आंकड़ों की विशेषता यह है कि इसमें कई आधुनिक पद्धतियों और नए डेटा स्रोतों को शामिल किया गया है जिससे अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिली है। डिफ्लेशन की उन्नत विधियों का उपयोग और प्रशासनिक डेटा सेट के व्यापक इस्तेमाल से जीडीपी आकलन अधिक सटीक बना है। सरकार का मानना है कि ये आंकड़े केवल आर्थिक वृद्धि नहीं दिखाते बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि विभिन्न सरकारी नीतियां और योजनाएं जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
विनिर्माण क्षेत्र ने इस अवधि में लगभग ग्यारह प्रतिशत की औसत वृद्धि दर्ज की है जो उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना जैसे कदमों के प्रभाव को दर्शाती है। कृषि क्षेत्र में भी मूल्य संवर्धन में बढ़ोतरी देखी गई है जिसमें उच्च मूल्य वाली फसलों और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों का योगदान रहा है।
इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र के लिए असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण जैसे नए डेटा स्रोतों को भी शामिल किया गया है जिससे व्यापार परिवहन और सेवा क्षेत्रों के आकलन में अधिक स्पष्टता आई है। डिजिटल इंडिया पहल के तहत उपलब्ध हुए जीएसटी ई वाहन और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली जैसे डेटा स्रोतों ने भी जीडीपी अनुमानों को अधिक विश्वसनीय और सटीक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।