पटना (बिहार):- बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से वीआरएस लेने का फैसला किया है। यह कदम भाजपा के बढ़ते दबदबे को साफ दिखाता है।नीतीश का अंतिम टर्म छोटानीतीश ने खुद कहा था कि यह उनका आखिरी कार्यकाल होगा। लेकिन इतनी जल्दी राज्यसभा जाने का फैसला चौंकाने वाला है। विपक्ष तेजस्वी यादव इसे भाजपा का महाराष्ट्र मॉडल बता रहे हैं। भाजपा ने नीतीश को किनारे लगाने की रणनीति अपनाई।
अब जदयू जूनियर पार्टनर बन गई।भाजपा का बढ़ता वर्चस्व2020 चुनावों में भाजपा ने 74 सीटें जीतीं जबकि जदयू को 43 मिलीं। 2025 विधानसभा में भाजपा 89 सीटों पर सवार है। कैबिनेट में 21 मंत्री पद हासिल कर भाजपा ने साफ संकेत दिया। गठबंधन में अब भाजपा बड़ा भाई। ईबीसी महादलित वोटों पर भी पकड़ मजबूत।अगला मुख्यमंत्री कौननीतीश के जाने से सवाल उठे हैं। क्या भाजपा अपना सीएम बनाएगी। समरथ वर्मा या अन्य नेता दौड़ में हैं। एनडीए बहुमत के करीब। निर्दलीय विधायकों से समर्थन संभव। बिहार की राजनीति नए दौर में।बिहार का भविष्यभाजपा का पूर्ण वर्चस्व तय। नीतीश दिल्ली राज्यसभा में किंगमेकर बन सकते हैं। लेकिन पटना में मोदी लहर हावी। विकास और सुशासन का एजें्डा चलेगा। विपक्ष कमजोर।