Health coach reveals मोहाली : मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में हड्डियों की घनता कम होना (ओस्टियोपेनिया) एक आम समस्या बन चुकी है। लेकिन एक स्वास्थ्य कोच ने अब जानकारी दी है कि नियमित साधारण गतिविधि अपनाकर 12 हफ्तों के भीतर इस समस्या को पलटा जा सकता है।
स्वास्थ्य कोच ने बताया कि उन सहित कई अध्ययनों में यह देखा गया है कि मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं द्वारा स्क्रीन पर आने वाली हड्डी-घनता में कमी को रोकने या धीमा करने में वजन-भारी (weight-bearing) एवं प्रतिरोधक (resistance) व्यायामों का महत्वपूर्ण योगदान है। उनका सुझाव है कि सप्ताह में कम से कम 3 दिन, प्रत्येक दिन लगभग 30–40 मिनट के लिए ज़मीन-आधारित गतिविधियाँ जैसे टहलना ऊँची वीभत्स सीढ़ियाँ चढ़ना-उतरना, हल्के जंप या हल्के पंजा-उठाने वाले व्यायाम, साथ ही हाथ-पैर उठाने वाली प्रतिरोधक गतिविधियाँ (जैसे बैंड का उपयोग, हल्के वजन उठाना) अपनाई जाएँ।
कोच का कहना है कि इन गतिविधियों से हड्डियों पर हल्का-मध्यम दबाव (loading) पड़ता है जिससे हड्डी निर्माण करने वाले कोशिकाएँ सक्रिय होती हैं, जिससे अल्प-काल में भी हड्डी-घनता में सुधार देखने को मिल सकता है। इसी तरह के व्यायामों को अपनाने वाली अध्ययन-संग्रह ने यह दिखाया है कि मेनोपॉज़ के बाद की महिलाओं में हड्डी-घनता में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला। स्वास्थ्य कोच ने यह भी कहा कि सिर्फ व्यायाम ही काफ़ी नहीं — आहार पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन D तथा प्रोटीन मिला आहार हड्डियों के पुनर्निर्माण में सहायक होता है। इसके साथ ही धूम्रपान व अत्यधिक शराब सेवन जैसी आदतों का त्याग करना भी महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बातें:
- शुरुआत में हल्के-मध्यम स्तर पर व्यायाम करें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें।
- कहीं दर्द या असुविधा हो रही हो, तो व्यायाम को रोकें और विशेषज्ञ की सलाह लें।
- यदि पहले से हड्डियों में बहुत कमी हो चुकी हो या संबंधित चिकित्सकीय समस्या हो, तो व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने से पहले डॉक्टर से चर्चा करें।
- निरंतरता महत्वपूर्ण है — 12 हफ्तों तक नियमितता बनाए रखने पर ही सुधार देखने को मिलता है।
यह संदेश मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं को यह याद दिलाता है कि हड्डियों की कमजोरी सिर्फ बूढ़े समय की समस्या नहीं है बल्कि समय रहते नियंत्रित व उल्टी जा सकती है। स्वास्थ्य कोच का यह सुझाव एक सरल तथा व्यवहार-योग्य उपाय प्रस्तुत करता है, जिससे महिलाएँ सक्रिय रह कर अपनी हड्डियों को मजबूत बना सकती हैं और आगे चलकर फ्रैक्चर (हड्डी टूटने) जैसे जोखिम को कम कर सकती हैं।