Parliament Budget Session /नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार 9 मार्च 2026 को शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने के लिए कई मोर्चे खोल दिए हैं। सबसे प्रमुख मुद्दा पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ता तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध है, जिसे लेकर कांग्रेस सहित पूरे ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने संसद में पूर्ण चर्चा की मांग की है।
विपक्ष की मांग: केवल बयान नहीं, पूरी बहस चाहिए
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खगे ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से दिया जाने वाला ‘सुओ मोटो’ (Suo Motu) बयान पर्याप्त नहीं है। विपक्ष का तर्क है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। विपक्ष ने साल 2003 के उस वाकये को याद दिलाया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय इराक युद्ध पर संसद में विस्तृत चर्चा हुई थी। विपक्ष चाहता है कि इस बार भी उसी तर्ज पर गंभीर बहस हो और भारत की विदेश नीति को लेकर स्पष्टता आए।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संबोधन
विपक्ष के भारी शोर-शराबे के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पश्चिम एशिया की स्थिति पर आधिकारिक बयान देंगे। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बात पर जोर देगी कि भारत की प्राथमिकता वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा और कच्चे तेल की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर ‘काम रोको प्रस्ताव’ (Rule 267) के तहत तुरंत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
सत्र के पहले ही दिन सदन में उस समय तनाव और बढ़ गया जब विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान उनके साथ पक्षपात किया जाता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘लोकतांत्रिक संस्थानों का अपमान’ बताया है।