Hight risk high reward /नई दिल्ली:- भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टी20 वर्ल्ड कप में भारत की शानदार जीत के बाद टीम की सफलता के पीछे के मूल मंत्र का खुलासा किया है। गंभीर के अनुसार, इस बार टीम इंडिया की रणनीति पारंपरिक क्रिकेट से हटकर ‘निडरता’ और ‘जोखिम’ पर आधारित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम मैनेजमेंट अब खिलाड़ियों को उनके द्वारा बनाए गए रनों की संख्या से नहीं, बल्कि खेल पर उनके ‘इम्पैक्ट’ (प्रभाव) से आंकता है।
रणनीति में बदलाव: ‘रन’ नहीं, ‘इम्पैक्ट’ है जरूरी
कोच गंभीर ने जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में 50 रन बनाना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि 10 गेंदों में 25 रन बनाकर मैच का पासा पलट देना। उन्होंने ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ (High Risk, High Reward) की सोच को टीम की संस्कृति का हिस्सा बनाया है।
“हमने खिलाड़ियों को साफ कर दिया था कि वे बिना किसी डर के खेलें। अगर वे जोखिम लेते हुए आउट भी होते हैं, तो मैनेजमेंट उनके साथ खड़ा है। हमारा लक्ष्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव बनाना था।” – गौतम गंभीर
जीत के पांच स्तंभ: किसका रहा सबसे बड़ा योगदान?
इस विश्व कप अभियान में कई खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से करोड़ों भारतीयों का दिल जीता। टीम की सफलता के मुख्य बिंदुओं पर नजर डालें तो कुछ नाम उभरकर सामने आते हैं:
संजू सैमसन की निरंतरता: संजू सैमसन ने इस टूर्नामेंट में खुद को एक मैच्योर बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। 05 मैचों में 321 रन बनाकर उन्होंने न केवल मध्यक्रम को मजबूती दी, बल्कि स्ट्राइक रेट के मामले में भी वो सबसे आगे रहे। उनकी बल्लेबाजी में स्थिरता और आक्रामकता का सही मिश्रण देखने को मिला।
जसप्रीत बुमराह का ‘बुमराह राज’: गेंदबाजी विभाग में बुमराह एक बार फिर ‘एक्स-फैक्टर’ साबित हुए। मुश्किल ओवरों में विकेट निकालना और डेथ ओवरों में रनों की गति पर अंकुश लगाना बुमराह की विशेषता रही। उनके स्पेल ने कई बार हारे हुए मैचों को भारत की झोली में डाल दिया।
शिवम दुबे का फिनिशिंग टच: लोअर मिडिल ऑर्डर में शिवम दुबे ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। कठिन पिचों पर और दबाव वाले मैचों में बड़े छक्के लगाकर उन्होंने टीम को उस स्कोर तक पहुँचाया जहाँ से गेंदबाज मैच बचा सकें।
ईशान किशन का धमाका: टीम के दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज के रूप में ईशान किशन ने पावरप्ले का भरपूर फायदा उठाया। उनके निडर अंदाज ने टीम को हर मैच में एक आक्रामक शुरुआत दी, जिससे बाद के बल्लेबाजों के लिए काम आसान हो गया।
एकजुटता की जीत: ‘टीम इंडिया’ का जज्बा
भले ही व्यक्तिगत प्रदर्शन शानदार रहे हों, लेकिन कोच गंभीर और कप्तान ने इस जीत का श्रेय ‘टीम वर्क’ को दिया है। मैदान पर खिलाड़ियों का एक-दूसरे के प्रति भरोसा और बेंच स्ट्रेंथ की मजबूती ने भारत को अजेय बनाया। गंभीर ने खिलाड़ियों पर जो भरोसा जताया, उसने हर खिलाड़ी को अपनी भूमिका स्पष्ट करने में मदद की।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
टीम की इस जीत के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर असली ‘इम्पैक्ट’ किसका था? जहाँ बुमराह के चाहने वाले उन्हें जीत का मसीहा मान रहे हैं, वहीं संजू सैमसन के प्रशंसक उनकी निरंतरता को सलाम कर रहे हैं। हालांकि, अधिकांश क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि यह पूरी टीम के एकजुट होकर खेलने का परिणाम है।