Rupee falls : 92 के पार पहुँचा रुपया, 53 पैसे टूटकर 92.35 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद

Rupee falls/नई दिल्ली:-भारतीय मुद्रा ‘रुपये’ के लिए आज का दिन बेहद निराशाजनक रहा। सोमवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 53 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.35 के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल ने भारतीय मुद्रा की कमर तोड़ दी है।

बाजार का हाल: शुरुआत से ही दबाव

विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार में मची भारी बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया। आज सुबह कारोबार की शुरुआत में ही रुपया कमजोर खुला था। पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) को यह 91.82 पर बंद हुआ था, लेकिन आज यह सीधे 92.22 पर खुला। दिन के दौरान इसमें थोड़ी रिकवरी की कोशिश दिखी पर शाम होते-होते इसने 92.35 का नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया।

रुपये के गिरने के 4 प्रमुख कारण

– कच्चे तेल की कीमतों में आग: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमतों में 15% से 25% तक का उछाल देखा गया। तेल की कीमतें 106 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई और रुपया कमजोर हुआ।

– शेयर बाजार में कोहराम: घरेलू शेयर बाजार में आज ‘ब्लैक मंडे’ जैसा नजारा रहा। सेंसेक्स 1,350 अंक और निफ्टी 422 अंक से ज्यादा टूट गया। बाजार में इस भारी गिरावट के कारण विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है।

– डॉलर इंडेक्स की मजबूती: दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ 0.35% बढ़कर 99.33 पर पहुँच गया। सुरक्षित निवेश के रूप में दुनिया भर के निवेशक डॉलर की ओर भाग रहे हैं।

– भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व (West Asia) में युद्ध के और भीषण होने की आशंका ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ रहा है।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट का सीधा असर आम भारतीय की जेब पर पड़ेगा:

– महंगाई का झटका: कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और फल-सब्जियों समेत रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी।

– विदेश यात्रा और पढ़ाई: जो छात्र विदेश में पढ़ रहे हैं या जो लोग विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।

– इलेक्ट्रॉनिक सामान: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय और आरबीआई का रुख

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें 110 डॉलर के पार स्थिर रहती हैं, तो रुपया आने वाले दिनों में 93.00 के स्तर को भी देख सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है। आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये की गिरावट को थामने की कोशिश कर सकता है।

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