Tehran threatens : तेहरान का नया कानून, समर्थन करने पर छिड़ सकती है अपनी ही विरासत

Tehran threatens/ तेहरान:-पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और आंतरिक अस्थिरता के बीच ईरान सरकार ने विदेशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एक सख्त और विवादास्पद फरमान जारी किया है। ईरानी न्यायपालिका और अभियोजक जनरल के कार्यालय (Prosecutor General’s Office) ने सोमवार, 9 मार्च 2026 को घोषणा की कि यदि कोई भी ईरानी नागरिक विदेश में रहकर ईरान पर हो रहे हमलों का समर्थन करता है या ‘दुश्मन देशों’ (अमेरिका और इजरायल) के साथ सहयोग करता है तो उसकी ईरान स्थित सभी चल-अचल संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान में सत्ता परिवर्तन का दौर चल रहा है और उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है।

सख्त कानून और नए प्रावधान

ईरानी राज्य मीडिया के अनुसार यह चेतावनी अक्टूबर 2025 में पारित एक नए कानून के तहत जारी की गई है। इस कानून का उद्देश्य ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ जासूसी और दुश्मनों के साथ सहयोग’ पर दंड को और अधिक कठोर बनाना है।

अभियोजक जनरल कार्यालय ने स्पष्ट किया:

> “जो ईरानी नागरिक विदेश में रह रहे हैं और किसी भी तरह से अमेरिकी-जायोनी (इजरायली) दुश्मन के साथ सहानुभूति रखते हैं, उनका समर्थन करते हैं या उनके साथ सहयोग करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त करने के साथ-साथ उन्हें कानून के तहत मृत्युदंड जैसी भारी सजा का भी सामना करना पड़ सकता है।”

विदेशी डायस्पोरा पर निशाना

रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान और हमलों के बाद, यूरोप और अमेरिका के कई शहरों में ईरानी प्रवासी समुदायों ने राजनीतिक बदलाव की मांग करते हुए प्रदर्शन किए थे। कुछ सोशल मीडिया चैनलों और टेलीग्राम ग्रुप्स में उन प्रमुख ईरानियों की जानकारी साझा की गई है जिन्होंने ईरान के धार्मिक नेतृत्व की आलोचना की थी या इजरायली हवाई हमलों का समर्थन किया था। ईरानी सरकार का मानना है कि इस तरह के लोग ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ का हिस्सा हैं और देश की संप्रभुता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दुनिया भर में लगभग 50 लाख से 1 करोड़ ईरानी नागरिक रहते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में बसा है। तेहरान का यह फरमान सीधे तौर पर इन लोगों को डराने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

जंग और सत्ता परिवर्तन का माहौल

ईरान इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में तेहरान के तेल भंडारण सुविधाओं और सैन्य मुख्यालयों को भारी नुकसान पहुंचा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इन हमलों में अब तक 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। मुजतबा खामेनेई का नेतृत्व संभालने का अर्थ है कि ईरान में कट्टरपंथियों की पकड़ और मजबूत होने वाली है। संपत्ति जब्ती की यह धमकी इसी नई और अधिक आक्रामक नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवाधिकार चिंताएं

मानवाधिकार संगठनों ने ईरान के इस फैसले की कड़ी निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की संपत्ति को केवल उसके राजनीतिक विचारों या अभिव्यक्ति के आधार पर जब्त करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान आर्थिक रूप से दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि कई प्रवासी ईरानी अपने देश में घर और अन्य निवेश रखते हैं। संपत्ति जब्त करने का डर उन्हें सरकार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने से रोक सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *