Transnationalism/ तेहरान:ईरान में सर्वोच्च नेता के उत्तराधिकार को लेकर चल रही चर्चाओं ने न केवल मध्य पूर्व, बल्कि अफ्रीका के सबसे बड़े देश नाइजीरिया में भी हलचल पैदा कर दी है। उत्तरी नाइजीरिया में सक्रिय शिया समुदाय, विशेष रूप से ‘इस्लामिक मूवमेंट इन नाइजीरिया’ (IMN) के समर्थकों ने आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे, मोजतबा खामेनेई के संभावित चयन को ‘इस्लामिक प्रतिरोध’ की जीत और निरंतरता के रूप में स्वीकार करने के संकेत दिए हैं।
वैश्विक इस्लामी प्रतिरोध का नया चेहरा
नाइजीरिया के प्रमुख शिया गढ़ों—कानो, कदुना और ज़ारिया—में मोजतबा खामेनेई के नाम को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय विश्लेषकों और धार्मिक नेताओं का मानना है कि मोजतबा न केवल अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाएंगे बल्कि पश्चिमी साम्राज्यवाद और इजरायल के खिलाफ चल रहे ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (प्रतिरोध के अक्ष) को भी नई मजबूती प्रदान करेंगे।
उत्तरी नाइजीरिया के शियाओं के लिए ईरान केवल एक देश नहीं बल्कि एक वैचारिक मार्गदर्शक है। IMN के एक स्थानीय सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम मोजतबा खामेनेई को केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने पिता के सिद्धांतों के रक्षक के रूप में देखते हैं। उनका नेतृत्व यह सुनिश्चित करेगा कि उत्पीड़ितों की आवाज़ दबने न पाए।”
मोजतबा खामेनेई और नाइजीरियाई शियाओं का संबंध
नाइजीरिया में शिया आंदोलन का उदय 1979 की ईरानी क्रांति से प्रेरित रहा है। शेख इब्राहिम अल-ज़ाकज़ाकी के नेतृत्व में इस आंदोलन ने उत्तरी नाइजीरिया के सुन्नी बहुल क्षेत्र में अपनी पैठ बनाई है। मोजतबा खामेनेई को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो पर्दे के पीछे रहकर दशकों से ईरान की सुरक्षा और रणनीतिक नीतियों को आकार दे रहे हैं। नाइजीरियाई समर्थकों का मानना है कि मोजतबा का सख्त रुख नाइजीरियाई सरकार द्वारा शियाओं पर किए जा रहे कथित दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में सहायक होगा।
विरासत और निरंतरता का सवाल
हालाँकि ईरान के भीतर उत्तराधिकार को लेकर कई संवैधानिक प्रक्रियाएं हैं, लेकिन नाइजीरियाई शिया समुदाय के लिए ‘निरंतरता’ सबसे महत्वपूर्ण शब्द है। उनके अनुसार, आयतुल्लाह अली खामेनेई ने जिस तरह से फिलिस्तीन, लेबनान और यमन के आंदोलनों को समर्थन दिया है, मोजतबा उसी राह पर चलेंगे। वे इसे एक वंशवादी उत्तराधिकार के बजाय एक ‘वैचारिक मशाल’ का हस्तांतरण मानते हैं।
क्षेत्रीय भू-राजनीति पर प्रभाव
नाइजीरिया में शियाओं की बढ़ती ताकत और ईरान के प्रति उनकी वफादारी अक्सर स्थानीय सरकार और सऊदी अरब समर्थक समूहों के बीच तनाव का कारण बनती है। मोजतबा के संभावित उत्थान को नाइजीरियाई सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्कता से देख रही हैं। जानकारों का कहना है कि यदि मोजतबा ईरान की कमान संभालते हैं तो अफ्रीका में ईरानी प्रभाव और अधिक आक्रामक हो सकता है जिससे नाइजीरिया में धार्मिक और राजनीतिक संतुलन प्रभावित होने की संभावना है।