कुनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘ज्वाला’ ने पांच शावकों को दिया जन्म, भारत में चीतों की संख्या 53 हुई, भारत में जन्मे शावकों की संख्या बढ़कर 33 पहुंची

नई दिल्ली :- कुनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘ज्वाला’ ने पांच शावकों को जन्म दिया। भारत में चीतों की संख्या 53 हुई, भारत में जन्मे शावकों की संख्या बढ़कर 33 पहुंची। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव (@byadavbjp) ने जानकारी दी कि नामीबियाई चीता ज्वाला ने तीसरी बार सफलतापूर्वक मां बनते हुए कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच शावकों को जन्म दिया है। यह भारतीय धरती पर चीतों के 10वें सफल प्रजनन का प्रतीक है और भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत में चीता संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी सफलता सामने आई है। मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म देकर नया इतिहास रच दिया है। इस घटना के बाद देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर तिरपन हो गई है। वहीं भारत में जन्म लेने वाले शावकों की संख्या अब तैंतीस तक पहुंच गई है।

इस महत्वपूर्ण जानकारी को केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने साझा किया। उन्होंने बताया कि ज्वाला तीसरी बार मां बनी है और इस बार उसने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह घटना भारत में चीता संरक्षण कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

भारत में चीतों की वापसी का अभियान वर्ष दो हजार बाईस में शुरू हुआ था। उस समय अफ्रीकी देश नामीबिया से कुछ चीतों को विशेष विमान के माध्यम से भारत लाया गया और उन्हें कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी कुछ चीतों को यहां लाया गया ताकि भारत में उनकी नई आबादी विकसित हो सके।

ज्वाला द्वारा पांच शावकों को जन्म देना इस परियोजना की दसवीं सफल प्रजनन घटना है। यह उपलब्धि यह साबित करती है कि भारत का पर्यावरण और वन क्षेत्र चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में भारत में चीतों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।

कुनो राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग और विशेषज्ञों की एक विशेष टीम लगातार चीतों की निगरानी कर रही है। उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षित वातावरण मिले। शावकों की देखभाल के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि वे स्वस्थ रूप से बड़े हो सकें।

चीता दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला स्थलीय जीव माना जाता है और कभी भारत के कई हिस्सों में पाया जाता था। हालांकि शिकार और आवास की कमी के कारण यह देश से पूरी तरह गायब हो गया था। अब सरकार और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से इसे फिर से भारतीय जंगलों में बसाने की कोशिश की जा रही है।

ज्वाला के पांच शावकों के जन्म ने इस उम्मीद को और मजबूत किया है कि आने वाले समय में भारत फिर से चीतों की धरती के रूप में पहचाना जाएगा। यह उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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