Vehicle Transfers : अब बिना ‘NOC’ के एक राज्य से दूसरे राज्य ले जा सकेंगे अपनी गाड़ी, सरकार खत्म कर सकती है सालों पुराना नियम

Vehicle transfers /नई दिल्ली:- भारत सरकार देश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देने के लिए परिवहन नियमों में एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) अंतर-राज्यीय वाहन हस्तांतरण (Inter-state vehicle transfer) के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की शर्त को समाप्त करने पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो नौकरीपेशा लोगों और बार-बार शहर बदलने वाले नागरिकों के लिए अपनी कार या बाइक को दूसरे राज्य में पंजीकृत कराना बेहद आसान हो जाएगा।

क्या है वर्तमान नियम और इसकी मुश्किलें?

वर्तमान में, यदि आप अपने वाहन को एक राज्य (जैसे दिल्ली) से दूसरे राज्य (जैसे महाराष्ट्र) में 12 महीने से अधिक समय के लिए ले जाते हैं, तो आपको मूल आरटीओ (RTO) से NOC लेना अनिवार्य होता है।

* भागदौड़: वाहन मालिक को पुराने आरटीओ के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिसमें अक्सर हफ्तों का समय और एजेंटों का भारी कमीशन खर्च होता है।

* दस्तावेजी प्रक्रिया: इसमें पुलिस क्लीयरेंस और क्राइम रिकॉर्ड की जांच जैसे कई जटिल चरण शामिल होते हैं।

* री-रजिस्ट्रेशन का दबाव: NOC मिलने के बाद ही नए राज्य में वाहन का पुन: पंजीकरण संभव हो पाता है, जो आम आदमी के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है।

नया डिजिटल प्रस्ताव: कैसे बदलेगी तस्वीर?

सरकार का नया प्रस्ताव ‘वन नेशन, वन रजिस्ट्रेशन’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस नए सिस्टम के तहत:

* डिजिटल डेटा शेयरिंग: राज्यों के आरटीओ को ‘वाहन 4.0’ (Vahan 4.0) पोर्टल के जरिए आपस में जोड़ा जाएगा। जब कोई व्यक्ति दूसरे राज्य में वाहन पंजीकरण के लिए आवेदन करेगा, तो नया आरटीओ स्वतः ही पुराने आरटीओ के डेटाबेस से वाहन की जानकारी और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर लेगा।

* BH सीरीज का विस्तार: भारत (BH) सीरीज की सफलता के बाद, सरकार अब सामान्य नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए भी इसी तरह की निर्बाध प्रक्रिया अपनाना चाहती है।

* ऑनलाइन एनओसी: भौतिक रूप से NOC लेने के बजाय, इसे ‘ऑटो-जेनरेटेड’ मोड पर डाला जा सकता है, जहाँ पुराने आरटीओ को केवल एक डिजिटल सूचना भेजी जाएगी।

आम आदमी को क्या होगा फायदा?

* समय और पैसे की बचत: इस नियम के हटने से लोगों को दलालों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी और आरटीओ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

* ट्रांसफर में आसानी: सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों, आईटी प्रोफेशनल्स और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए तबादले के दौरान वाहन ले जाना तनावमुक्त हो जाएगा।

* पुराने वाहनों की रीसेल वैल्यू: अंतर-राज्यीय एनओसी की बाध्यता खत्म होने से पुराने वाहनों को दूसरे राज्यों में बेचना आसान होगा, जिससे मालिकों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।

राज्यों के राजस्व का क्या होगा?

इस सुधार की राह में सबसे बड़ी चुनौती ‘रोड टैक्स’ का बंटवारा है। वर्तमान में, एक राज्य से दूसरे राज्य जाने पर वाहन मालिक को पुराने राज्य से टैक्स रिफंड मांगना पड़ता है और नए राज्य में फिर से टैक्स भरना पड़ता है। सरकार एक ऐसे ‘सेंट्रलाइज्ड रिफंड सिस्टम’ पर काम कर रही है, जहाँ टैक्स का समायोजन ऑटोमैटिक तरीके से राज्यों के बीच हो जाएगा, जिससे आम नागरिक को रिफंड के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा।

विशेषज्ञों की राय

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘परिवहन सेवा’ के डिजिटलीकरण के इस दौर में फिजिकल एनओसी की प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है। यदि आधार और पैन कार्ड की तरह वाहन का डेटा भी नेशनल ग्रिड पर उपलब्ध है, तो एनओसी जैसी औपनिवेशिक काल की प्रक्रियाओं को हटाना ही समझदारी है। मंत्रालय इस महीने के अंत तक राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक कर इस पर अंतिम सहमति बना सकता है।

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