Renault duster/चेन्नई:- रेनॉ डस्टर की भारतीय बाजार में वापसी एक नए और सशक्त प्लेटफॉर्म RGMP के साथ हो रही है। हालांकि वैश्विक स्तर पर डस्टर ‘CMF-B’ प्लेटफॉर्म पर आधारित है लेकिन भारत के लिए रेनॉ ने इसे खास तौर पर RGMP (Renault Group Modular Platform) में बदला है। कंपनी का दावा है कि इस गाड़ी का 90% हिस्सा विशेष रूप से भारत की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ‘री-इंजीनियर’ किया गया है।
RGMP प्लेटफॉर्म: आखिर यह अलग क्यों है?
1. भारतीय सड़कों के लिए खास बनावट:
यूरोपीय डस्टर की तुलना में भारतीय डस्टर का केबिन 40mm ऊंचा है और इसका कुल कद 50mm ज्यादा है। भारत के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और बड़े गड्ढों को देखते हुए इसमें 212mm का ग्राउंड क्लीयरेंस दिया गया है, जो इस सेगमेंट में सबसे बेहतरीन है।
2. 5-स्टार सेफ्टी का लक्ष्य:
RGMP प्लेटफॉर्म को सुरक्षा के उच्चतम मानकों (BNCAP और Global NCAP) को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसके ढांचे में 57% हाई-स्ट्रेंथ स्टील का उपयोग किया गया है। रेनॉ के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म को 64 किमी/घंटा की गति पर क्रैश टेस्ट के लिए तैयार किया गया है, जो मानक नियमों से भी अधिक है।
3. ‘गूगल’ के साथ डिजिटल नर्वस सिस्टम:
इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत इसका नया इलेक्ट्रॉनिक्स ढांचा है, जिसे SWEET400 कहा जाता है। इसे गूगल के सहयोग से विकसित किया गया है। यह सिस्टम न केवल इंफोटेनमेंट को तेज बनाता है, बल्कि ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) को भारतीय ट्रैफिक और सड़क संकेतों के हिसाब से सटीक तरीके से काम करने में मदद करता है।
भविष्य के लिए तैयार (Multi-Powertrain Ready)
RGMP एक बेहद लचीला (Modular) प्लेटफॉर्म है। इसका मतलब है कि डस्टर के अलावा रेनॉ भविष्य में इसी प्लेटफॉर्म पर 4-मीटर से छोटी एसयूवी (जैसे नई काइगर) और 7-सीटर बड़ी एसयूवी भी बना सकेगी।
* यह प्लेटफॉर्म पेट्रोल, हाइब्रिड, सीएनजी और यहां तक कि पूरी तरह इलेक्ट्रिक (EV) इंजन को भी सपोर्ट करता है।
* भारत में डस्टर को 1.0-लीटर टर्बो और 1.3-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ पेश किया जाएगा, जबकि दीपावली 2026 तक इसका स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वर्जन भी लॉन्च होगा।
आरामदायक सफर के लिए खास सस्पेंशन
भारतीय सड़कों पर झटकों को कम करने के लिए इसमें MTV CL (Multi-Tuned Valve) तकनीक वाला सस्पेंशन दिया गया है। साथ ही, सेगमेंट में सबसे मोटा 25mm एंटी-रोल बार लगाया गया है, जो तेज मोड़ पर भी गाड़ी को स्थिर रखता है। इसके केबिन को शांत रखने के लिए रेनॉ ने IIT कानपुर की विंड टनल में इसके डिजाइन का परीक्षण किया है ताकि तेज रफ्तार पर हवा का शोर (Wind Noise) कम से कम हो।