LPG supply cut /लखनऊ:- देश के कई प्रमुख शहरों में व्यावसायिक (Commercial) गैस सिलिंडरों की आपूर्ति अचानक ठप होने से हाहाकार मच गया है। तेल कंपनियों द्वारा आपूर्ति पर लगाई गई इस अघोषित रोक ने न केवल छोटे-बड़े होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की कमर तोड़ दी है, बल्कि उन पांच लाख से अधिक लोगों के सामने भोजन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, जो अपनी दैनिक खुराक के लिए बाहरी खान-पान (Street Food/Mess) पर निर्भर हैं।
क्यों थमी सिलिंडरों की रफ्तार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध (जैसे अमेरिका-ईरान तनाव) के कारण आयात-निर्यात श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। आपूर्ति में आई इस बाधा के कारण सरकार और तेल कंपनियों ने ‘घरेलू उपभोक्ताओं’ को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, जिसका सीधा खामियाजा ‘व्यावसायिक श्रेणी’ को भुगतना पड़ रहा है। इंडियन ऑयल और अन्य कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में प्लांट से कमर्शियल सिलिंडरों की रिफिलिंग और लोडिंग को सीमित कर दिया गया है।
पांच लाख लोगों पर सीधा प्रहार: कौन होगा प्रभावित?
राजधानी लखनऊ सहित कई मेट्रो शहरों में यह संकट सबसे ज्यादा गहराया है। आंकड़ों के अनुसार, केवल एक बड़े शहर में लगभग पांच लाख से अधिक आबादी ऐसी है जो घर से बाहर खाना खाती है। इसमें शामिल हैं:
* छात्र और प्रतियोगी परीक्षार्थी: पीजी और हॉस्टल में रहने वाले हजारों छात्र, जो टिफिन सर्विस या मेस पर निर्भर हैं।
* दिहाड़ी मजदूर: सड़कों के किनारे ढाबों पर भोजन करने वाले श्रमिक।
* कामकाजी पेशेवर: ऑफिस जाने वाले लोग जो दोपहर के भोजन के लिए छोटे रेस्टोरेंट्स का सहारा लेते हैं।
स्ट्रीट फूड और छोटे वेंडर्स की बढ़ी मुश्किलें
आपूर्ति रुकने से सबसे ज्यादा असर स्ट्रीट फूड वेंडरों और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ा है। इनके पास घरेलू गैस कनेक्शन के उपयोग की अनुमति नहीं है और व्यावसायिक सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं। कई दुकानदारों ने कच्चे माल की बर्बादी के डर से अपनी दुकानें बंद करना शुरू कर दिया है। होटल एसोसिएशन का कहना है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो शहर के 70% से अधिक रेस्टोरेंटों में चूल्हे ठंडे पड़ जाएंगे।
महंगाई की दोहरी मार
एक तरफ सिलिंडरों की किल्लत है तो दूसरी तरफ जो थोड़े-बहुत सिलिंडर उपलब्ध हैं उनके दाम आसमान छू रहे हैं। हाल ही में कमर्शियल सिलिंडर की कीमतों में ₹115 तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आपूर्ति में कमी का फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में सिलिंडरों की ‘कालाबाजारी’ की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता की थाली और महंगी हो गई है।
प्रशासन की चेतावनी और तैयारी
गैस संकट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है। जिलाधिकारियों ने क्षेत्रीय आपूर्ति निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे एजेंसियों पर कड़ी नजर रखें। यूपी के कई जिलों में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई एजेंसी जानबूझकर आपूर्ति रोकती है या कालाबाजारी में लिप्त पाई जाती है, तो उसके खिलाफ एस्मा (ESMA) या अन्य कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।