Kerala HC : सरकारी उपलब्धियों के ‘बल्क मैसेज’ भेजने पर रोक से इनकार, सभी याचिकाएं खारिज

Kerala HC/कोच्चि:- केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों और आम जनता को सरकार की ‘उपलब्धियों’ के संबंध में भेजे जा रहे बल्क मैसेज (Bulk Messages) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा अपनी नीतियों और कार्यों के बारे में नागरिकों को सूचित करना किसी भी तरह से कानून का उल्लंघन या निजता का हनन नहीं माना जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल सरकार ने बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और आम नागरिकों के मोबाइल फोन पर एसएमएस (SMS) और व्हाट्सएप के जरिए संदेश भेजने शुरू किए। इन संदेशों में सरकार की पिछले कुछ वर्षों की विकास परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सफलताओं का विवरण दिया गया था। याचिकाकर्ताओं जिनमें कुछ सरकारी कर्मचारी और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता शामिल ने अदालत में दलील दी थी कि:

* यह सरकारी धन का दुरुपयोग है।

* यह नागरिकों की निजता (Privacy) का उल्लंघन है।

* सरकारी तंत्र का उपयोग राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा है।

अदालत का तर्क और फैसला

न्यायमूर्ति की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं की दलीलों को अपर्याप्त माना। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का यह कर्तव्य और अधिकार है कि वह जनता को बताए कि उनके लिए क्या किया जा रहा है। अदालत ने टिप्पणी की “सरकार द्वारा अपनी उपलब्धियों को साझा करना सूचना के प्रसार का एक हिस्सा है। इसे केवल राजनीतिक प्रचार के चश्मे से नहीं देखा जा सकता, खासकर जब संदेशों की सामग्री सार्वजनिक नीतियों से जुड़ी हो।”

निजता के उल्लंघन पर स्पष्टीकरण

याचिकाकर्ताओं का एक मुख्य तर्क यह था कि सरकार बिना अनुमति के उनके निजी नंबरों पर संदेश भेज रही है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी डेटाबेस में मौजूद नंबरों का उपयोग जनहित और सूचना के लिए करना गैर-कानूनी नहीं है। अदालत ने यह भी नोट किया कि यदि संदेशों में कोई आपत्तिजनक या डराने वाली सामग्री नहीं है तो उन्हें प्राप्त करना निजता का गंभीर उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

विपक्ष और सरकार की प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहाँ राज्य सरकार ने इसे अपनी ‘नैतिक जीत’ बताया है, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला सरकार को सरकारी संसाधनों के जरिए ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाने की खुली छूट दे सकता है। सरकारी वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि ये संदेश केवल ‘अचीवमेंट’ बताने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को उन योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए भी थे जिनका लाभ वे उठा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *