Condemnation/दिल्ली:-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता जी के विरुद्ध हाल ही में की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर संतों और हिंदू समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी सम्मानित व्यक्ति की माता पर की गई टिप्पणी संपूर्ण समाज का अपमान है। शंकराचार्य ने दोटूक शब्दों में कहा, “योगी आदित्यनाथ की मां केवल उनकी मां नहीं बल्कि हमारी भी मां हैं। सनातन धर्म में माता का स्थान सर्वोपरि है और उनके सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”
“अपने मौलानाओं को मर्यादा सिखाएं मजहबी नेता”
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस विवाद के संदर्भ में मुस्लिम धर्मगुरुओं और समाज के जिम्मेदार लोगों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग मजहबी उन्माद में आकर मर्यादा की सीमाएं लांघ जाते हैं। उन्होंने अपील की कि मजहब के जिम्मेदार लोग अपने मौलानाओं और वक्ताओं को समझाएं कि वे किसी की व्यक्तिगत आस्था या परिवार, विशेषकर माता-बहनों पर ओछी टिप्पणी करने से बाज आएं। उन्होंने आगे कहा, “यदि कोई व्यक्ति राजनीतिक रूप से किसी से असहमत है तो वह नीति और सिद्धांतों पर बहस करे। लेकिन राजनीति के अखाड़े में परिवार और वृद्ध माता को खींच लाना कायरता और संस्कारहीनता का परिचायक है।”
विवाद की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा मामला?
दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक सोशल मीडिया वीडियो और कुछ सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता जी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कही गईं। चूंकि योगी आदित्यनाथ एक सन्यासी हैं और वर्तमान में देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं इसलिए उनके परिवार पर किया गया यह हमला जल्द ही एक बड़े सामाजिक और धार्मिक मुद्दे में तब्दील हो गया। मुख्यमंत्री की माता जी जो कि एक साधारण और सात्विक जीवन व्यतीत करती हैं उनके प्रति इस तरह की भाषा के उपयोग ने देशभर के संतों को एकजुट कर दिया है।
सनातन परंपरा में सन्यासी और माता का संबंध
शंकराचार्य ने धार्मिक पक्ष रखते हुए समझाया कि भले ही एक सन्यासी सांसारिक बंधनों का त्याग कर देता है, लेकिन जिस माता ने उसे जन्म दिया, उसका स्थान ईश्वर से भी ऊंचा रहता है। उन्होंने कहा, “सन्यास धर्म में भी माता के प्रति कृतज्ञता कम नहीं होती। योगी जी देश सेवा में समर्पित हैं, इसका अर्थ यह नहीं कि कोई भी उठकर उनके परिवार को निशाना बनाए।”
कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए जो समाज में विद्वेष फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ गाली देना या अपमान करना नहीं है। यदि समय रहते इन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो समाज में आक्रोश और बढ़ सकता है।
संत समाज की एकजुटता
शंकराचार्य के इस बयान का हरिद्वार से लेकर काशी तक के अन्य संतों ने भी पुरजोर समर्थन किया है। अखाड़ा परिषद के कई सदस्यों ने भी स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा है कि मातृशक्ति का अपमान सनातन संस्कृति में ‘अक्षम्य अपराध’ माना जाता है। संतों ने चेतावनी दी है कि यदि टिप्पणी करने वालों ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी और प्रशासन ने कठोर कदम नहीं उठाए तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।