Mahua Moitra Vs Om Birla/नई दिल्ली:-संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रैंड सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए। सदन की कार्यवाही के दौरान महुआ मोइत्रा ने विपक्ष के प्रति भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मौजूदा शासन के तहत विपक्षी सांसदों की आवाज को तकनीकी और रणनीतिक तरीके से दबाया जा रहा है।
“माइक ऑफ और ब्लैंक आउट का खेल”
सदन को संबोधित करते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यकाल में विपक्षी सांसदों के माइक को बीच वाक्य में बंद कर देने की कला को ‘परफेक्ट’ कर लिया गया है। इतना ही नहीं, यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि जब भी हम (विपक्ष) कोई महत्वपूर्ण मुद्दा उठाएं, तो संसद टीवी (Sansad TV) हमें पूरी तरह से ब्लैक आउट कर दे।” मोइत्रा का यह बयान उस समय आया जब सदन में अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए ‘हटाने के प्रस्ताव’ (Resolution for Removal) पर चर्चा की मांग की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के मंदिर में अब केवल सत्ता पक्ष की गूंज सुनाई देती है, जबकि जनता के असली मुद्दों को उठाने वाले विपक्षी चेहरों को कैमरों और माइक्रोफोन की पहुंच से दूर कर दिया जाता है।
विपक्ष का एकजुट हमला
महुआ मोइत्रा के इन आरोपों को कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। सदन में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और के.सी. वेणुगोपाल ने भी अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। विपक्ष का तर्क है कि लोकसभा अध्यक्ष का व्यवहार “पक्षपाती” (Partisan) होता जा रहा है और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत अन्य प्रमुख नेताओं को बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। सदन में मौजूद विपक्षी सदस्यों ने ‘संसद टीवी’ के कवरेज पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जब विपक्ष विरोध प्रदर्शन करता है या सरकार को घेरता है, तो कैमरा केवल अध्यक्ष की कुर्सी या सत्ता पक्ष की सीटों की ओर मोड़ दिया जाता है, जिससे देश को सदन की पूरी सच्चाई नहीं दिख पाती।
इतिहास और विवादों का साया
गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा और ओम बिरला के बीच टकराव नया नहीं है। 2023 में ‘कैश फॉर क्वेरी’ विवाद के बाद मोइत्रा की निष्कासन प्रक्रिया और उसके बाद 2024 में उनकी दोबारा जीत ने इस राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को और गहरा कर दिया है। आज के भाषण में मोइत्रा ने स्पष्ट किया कि उन्हें सदन से बाहर निकालने की कोशिशें उन्हें चुप नहीं करा सकीं।
सरकार का बचाव
वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार का कहना है कि माइक बंद करने का कोई “सिस्टम” नहीं है, बल्कि यह समय सीमा समाप्त होने के बाद की एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने महुआ मोइत्रा के बयानों को “अध्यक्ष की गरिमा पर ठेस” पहुंचाने वाला करार दिया।