वाशिंगटन (अमेरिका):- हाल के सैन्य विश्लेषणों और चर्चाओं में एक दिलचस्प उदाहरण बार-बार सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि अरबों डॉलर की कीमत वाले अत्याधुनिक युद्धपोत या “समुद्री किले” भी कभी-कभी अपेक्षाकृत सस्ती पनडुब्बियों के सामने कमजोर पड़ सकते हैं। इसी संदर्भ में अमेरिकी नौसेना की ताकत पर भी चर्चा तेज हो गई है कि कैसे कम लागत वाली पनडुब्बी भी बड़े जहाजों के लिए खतरा बन सकती है।
अक्सर उदाहरण के तौर पर विशाल विमानवाहक पोतों को लिया जाता है। अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक जहाज जैसे USS Gerald R. Ford को दुनिया के सबसे शक्तिशाली समुद्री युद्धपोतों में गिना जाता है। इसकी लागत अरबों डॉलर बताई जाती है और इसे आधुनिक रडार, मिसाइल रक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमानों से लैस किया जाता है।
लेकिन सैन्य विशेषज्ञ बताते हैं कि समुद्री युद्ध में पनडुब्बियों की भूमिका बेहद खतरनाक होती है। छोटी और अपेक्षाकृत सस्ती पनडुब्बियां समुद्र के भीतर छिपकर लंबी दूरी से टॉरपीडो या मिसाइल दाग सकती हैं। कई बार इन्हें पकड़ना बेहद कठिन होता है क्योंकि वे पानी के भीतर रडार से बचकर चलती हैं।
इसी वजह से रणनीतिक चर्चाओं में यह बात कही जाती है कि यदि किसी बड़ी नौसैनिक टुकड़ी के आसपास सुरक्षा घेरा कमजोर हो जाए तो छोटी पनडुब्बी भी बड़े जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आधुनिक युद्ध में इसे “असमान युद्ध क्षमता” कहा जाता है यानी कम लागत वाला हथियार भी महंगे सिस्टम को चुनौती दे सकता है।
हालांकि वास्तविक युद्ध में बड़े युद्धपोत अकेले नहीं चलते। उनके साथ कई सुरक्षा जहाज पनडुब्बी रोधी हेलीकॉप्टर और उन्नत सेंसर सिस्टम तैनात रहते हैं। बड़े नौसैनिक बल ऐसे खतरों से निपटने के लिए कई परतों वाली सुरक्षा व्यवस्था रखते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सैन्य रणनीति में सिर्फ हथियार की कीमत नहीं बल्कि उसकी रणनीतिक उपयोगिता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। कभी-कभी कम लागत वाले हथियार भी युद्ध के समीकरण बदल सकते हैं।
समुद्री युद्ध की यही जटिलता आज दुनिया की नौसेनाओं को लगातार नई तकनीक और रणनीति विकसित करने के लिए प्रेरित कर रही है।