Health tips :- आज के समय में छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए कई तरह की दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर लोग दवा का नाम तो सुन लेते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि उसका सही इस्तेमाल किस बीमारी में किया जाता है। सही जानकारी होने से मरीज समय पर इलाज करा सकता है और गलत दवा लेने से भी बच सकता है। हालांकि डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
दर्द और बुखार में काम आने वाली दवाएं
बुखार और सामान्य दर्द के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा पैरासिटामोल है। इसके अलावा आइबुप्रोफेन और ट्रामाडोल का उपयोग दर्द और सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। गंभीर दर्द की स्थिति में डॉक्टर मॉर्फिन जैसी शक्तिशाली दवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
बैक्टीरियल और अन्य संक्रमण के इलाज की दवाएं
संक्रमण होने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। इनमें एमोक्सिसिलिन, डॉक्सीसाइक्लिन, एज़िथ्रोमाइसिन और सिप्रोफ्लोक्सासिन का उपयोग अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरियल इन्फेक्शन में किया जाता है। वहीं मेट्रोनिडाजोल प्रोटोजोअल और कुछ विशेष संक्रमणों के इलाज में उपयोगी होती है।
पेट और एसिडिटी से जुड़ी समस्याएं
पेट में एसिडिटी, गैस या अल्सर की समस्या में ओमेप्राज़ोल, पैंटोप्राजोल, रैनिटिडाइन और फैमोटिडाइन जैसी दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को कम करने में मदद करती हैं।
एलर्जी और अस्थमा में उपयोगी दवाएं
एलर्जी के मामलों में लॉराटाडाइन और सेटिरिज़िन जैसी एंटी-एलर्जिक दवाएं दी जाती हैं। वहीं अस्थमा और सांस की समस्या में एल्ब्यूटेरोल, साल्बुटामोल और मोंटेलुकास्ट जैसी दवाएं मरीज को राहत देती हैं।
दिल और ब्लड प्रेशर की दवाएं
उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन के इलाज में एम्लोडिपिन, लोसार्टन, एनालाप्रिल, बिसोप्रोलोल और हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
दिल से जुड़ी समस्याओं में डिगोक्सिन (हार्ट एरिथमिया) और क्लोपिडोग्रेल व वारफेरिन जैसी दवाएं खून को पतला रखने के लिए दी जाती हैं।
डायबिटीज और हार्मोन से जुड़ी दवाएं
डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए मेटफॉर्मिन और जरूरत पड़ने पर इंसुलिन दिया जाता है। वहीं थायरॉइड की कमी यानी हाइपोथायरायडिज्म में लेवोथायरोक्सिन का उपयोग किया जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं
डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं में डॉक्टर फ्लूओक्सेटीन, एस्सिटालोप्राम, सेर्ट्रालाइन, डायजेपाम, लोराज़ेपम और क्लोनाज़ेपम जैसी दवाएं देते हैं। इनका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।
अन्य महत्वपूर्ण दवाएं
कुछ दवाएं विशेष बीमारियों के इलाज में उपयोगी होती हैं। जैसे एलोप्यूरिनॉल गाउट के इलाज में, गैबापेंटिन नसों के दर्द में, फ्यूरोसेमाइड शरीर में सूजन कम करने के लिए, टैमसुलोसिन प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या में और मेथोट्रेक्सेट रूमेटाइड आर्थराइटिस के इलाज में दी जाती है।
मतली और उल्टी की समस्या में डोमपेरिडोन भी डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली सामान्य दवा है।
दवाइयों के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी दवा का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। गलत दवा या गलत मात्रा से शरीर को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखने पर पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही दवा, सही समय पर और सही मात्रा में लेने से ही इलाज प्रभावी होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकता है।
दवाइयां और उनके इस्तेमाल :
1) पैरासिटामोल → दर्द, बुखार
2) एमोक्सिसिलिन → बैक्टीरियल इन्फेक्शन
3) ओमेप्राज़ोल → एसिड रिफ्लक्स, अल्सर
4) लॉराटाडाइन → एलर्जी
5) एम्लोडिपिन → हाइपरटेंशन
6) मेटफॉर्मिन → टाइप 2 डायबिटीज
7) डायजेपाम → एंग्जायटी, इंसोम्निया
8) एटोरवास्टेटिन → हाई कोलेस्ट्रॉल
9) सिप्रोफ्लोक्सासिन → यूरिनरी इन्फेक्शन
10) रैनिटिडाइन → गैस्ट्रिक अल्सर
11) आइबुप्रोफेन → दर्द, सूजन
12) लेवोथायरोक्सिन → हाइपोथायरायडिज्म
13) क्लोपिडोग्रेल → ब्लड थिनर
14) एल्ब्यूटेरोल → अस्थमा, COPD
15) फ्लूओक्सेटीन → डिप्रेशन
16) लोसार्टन → हाइपरटेंशन
17) डॉक्सीसाइक्लिन → बैक्टीरियल इन्फेक्शन
18) इंसुलिन → डायबिटीज मेलिटस
19) ट्रामाडोल → हल्का से तेज़ दर्द
20) पैंटोप्राजोल → GERD, एसिड रिफ्लक्स
21) सेटिरिज़िन → एलर्जिक राइनाइटिस
22) वारफेरिन → एंटीकोएगुलेंट
23) मॉर्फिन → तेज़ दर्द
24) एस्सिटालोप्राम → डिप्रेशन, एंग्जायटी
25) फ्यूरोसेमाइड → एडिमा, हाइपरटेंशन
26) एज़िथ्रोमाइसिन → रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन
27) प्रेडनिसोलोन → एंटी-इंफ्लेमेटरी
28) गैबापेंटिन → न्यूरोपैथिक दर्द
29) डोमपेरिडोन → मतली, उल्टी
30) बिसोप्रोलोल → हार्ट फेलियर
31) मोंटेलुकास्ट → अस्थमा, एलर्जी
32) डिगोक्सिन → हार्ट एरिथमिया
33) सेर्ट्रालाइन → डिप्रेशन
34) मेट्रोनिडाजोल → प्रोटोजोअल इन्फेक्शन
35) एनालाप्रिल → हाइपरटेंशन
36) लोराज़ेपम → एंग्जायटी, सेडेशन
37) रोसुवास्टेटिन → कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल
38) साल्बुटामोल → ब्रोंकोस्पाज्म
39) एलोप्यूरिनॉल → गाउट
40) क्लोनाज़ेपम → दौरे की बीमारी
41) टैमसुलोसिन → बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया
42) फैमोटिडाइन → एसिड रिफ्लक्स
43) मेथोट्रेक्सेट → रूमेटाइड आर्थराइटिस
44) हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड → डाइयूरेटिक