Aviation news /नई दिल्ली:- अगर आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। एयर इंडिया समूह (Air India Group) ने घोषणा की है कि वह 12 मार्च से अपनी सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से ‘फ्यूल सरचार्ज’ लागू करने जा रहा है। कंपनी ने इस फैसले के पीछे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को मुख्य कारण बताया है।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि एयरलाइंस के परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केवल ईंधन यानी एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) पर खर्च होता है। पिछले कुछ हफ्तों में खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। एयर इंडिया के अनुसार, ईंधन की लागत में इस ‘शार्प राइज’ (तेज वृद्धि) को अब यात्रियों के साथ साझा करना उनकी मजबूरी बन गई है ताकि परिचालन को सुचारू रूप से जारी रखा जा सके।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा ‘सरचार्ज’
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह सरचार्ज एक साथ नहीं, बल्कि चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से लागू किया जाएगा।
* विभिन्न वैश्विक मार्ग: सरचार्ज की राशि उड़ान की दूरी और रूट के आधार पर अलग-अलग होगी।
* घरेलू और अंतरराष्ट्रीय: भारत के भीतर चलने वाली उड़ानों के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों जाने वाली उड़ानों पर भी इसका असर दिखेगा।
* लंबी दूरी की उड़ानें: माना जा रहा है कि लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर सरचार्ज की राशि अधिक हो सकती है, क्योंकि वहां ईंधन की खपत ज्यादा होती है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
12 मार्च से प्रभावी होने वाले इस फैसले के बाद टिकटों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, जिन यात्रियों ने पहले ही टिकट बुक कर लिए हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ेगा। लेकिन कल से होने वाली नई बुकिंग्स के लिए यात्रियों को बेस फेयर और टैक्स के अलावा ‘फ्यूल सरचार्ज’ के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
विमानन क्षेत्र में हलचल
एयर इंडिया के इस कदम के बाद अब बाजार की नजरें अन्य निजी एयरलाइंस जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट और अकासा एयर पर टिकी हैं। आमतौर पर जब बड़ी एयरलाइंस ईंधन अधिभार लगाती हैं, तो अन्य कंपनियां भी घाटे से बचने के लिए इसी रास्ते पर चलती हैं। यदि ऐसा होता है, तो पूरा घरेलू विमानन बाजार महंगा हो जाएगा, जिससे पर्यटन और बिजनेस ट्रैवल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।