किसान की पुकार और व्यवस्था की खामोशी, बेटी की शादी तय और नहीं बिक रही फसल

गुना (मध्य प्रदेश) :- देश की कृषि व्यवस्था का एक दर्दनाक सच उस समय सामने आया जब मध्य प्रदेश के गुना की मंडी में एक किसान की भावुक पुकार लोगों के दिल को छू गई। अपनी फसल बेचने की उम्मीद में मंडी पहुंचे उस किसान की आंखों में आंसू थे और आवाज में बेबसी साफ झलक रही थी। वह बार बार कह रहा था कि उसकी बेटी की शादी तय हो चुकी है और उसे टीका की रस्म निभानी है। अगर उसकी फसल बिक जाएगी तो उसकी इज्जत बच जाएगी और वह अपनी जिम्मेदारी निभा पाएगा।

 

लेकिन मंडी के शोर और अव्यवस्था के बीच उसकी यह दर्द भरी आवाज कहीं दबकर रह गई। आसपास मौजूद लोग अपनी अपनी व्यस्तता में लगे रहे और व्यवस्था की मशीनरी भी उसकी पुकार को सुनने में असफल नजर आई। यह घटना केवल एक किसान की कहानी नहीं है बल्कि देश के लाखों किसानों की उस पीड़ा का प्रतीक है जो अक्सर अनसुनी रह जाती है।

 

किसान पूरे साल मेहनत करता है। धूप हो या बारिश वह खेत में पसीना बहाता है ताकि अच्छी फसल उगा सके। लेकिन जब वही किसान अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचता है तो उसे सही दाम के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कई बार लंबी कतारें होती हैं कई बार खरीद में देरी होती है और कई बार बाजार की अनिश्चितता उसके सपनों को तोड़ देती है।

 

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसानों की आवाज कब तक अनसुनी रहेगी। अक्सर देखा जाता है कि जब किसान अपनी समस्याओं को लेकर बड़े आंदोलन करते हैं तभी उनकी बातें सत्ता तक पहुंचती हैं। लेकिन छोटे छोटे दर्द और रोजमर्रा की परेशानियां उसी तरह मंडियों और गांवों के बीच दबकर रह जाती हैं।

 

जरूरत इस बात की है कि किसानों की समस्याओं को समय रहते सुना जाए और उनके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे उन्हें अपनी मेहनत का सम्मानजनक मूल्य मिल सके। जब तक किसान मजबूत नहीं होगा तब तक देश की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों मजबूत नहीं हो सकते।

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