अमेरिका की गलती से सीखा भारत: शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली से ड्रोन गिराना क्यों माना जा रहा है महंगी रणनीति, अब रूस की ओर देख रही वायुसेना

नई दिल्ली :- दुनिया भर में युद्ध की बदलती रणनीतियों के बीच अब छोटे और सस्ते ड्रोन बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। हाल के वर्षों में कई देशों ने देखा कि महंगी वायु रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल छोटे ड्रोन गिराने के लिए करना व्यावहारिक नहीं होता। इसी अनुभव से सीख लेते हुए भारत भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है। माना जा रहा है कि महंगी मिसाइल प्रणालियों की बजाय सस्ते और खास तौर पर ड्रोन रोधी हथियारों पर ध्यान बढ़ाया जा रहा है।

महंगी मिसाइल से सस्ते ड्रोन गिराने की समस्या

आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां बड़े लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज़ मिसाइल को रोकने के लिए बनाई जाती हैं। इन प्रणालियों की एक मिसाइल की कीमत ही करोड़ों रुपये में होती है।

दूसरी ओर, युद्ध में इस्तेमाल होने वाले कई ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। ऐसे में अगर हर ड्रोन को गिराने के लिए महंगी मिसाइल इस्तेमाल की जाए तो यह आर्थिक रूप से बहुत भारी पड़ सकता है। इसी वजह से रक्षा विशेषज्ञ इसे रणनीतिक रूप से अव्यावहारिक मानते हैं।

अमेरिका के अनुभव से मिली सीख

पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में हुए संघर्षों के दौरान अमेरिका और उसके सहयोगियों को भी इसी तरह की चुनौती का सामना करना पड़ा। कई बार छोटे ड्रोन को रोकने के लिए बेहद महंगी मिसाइलों का उपयोग करना पड़ा, जिससे रक्षा लागत तेजी से बढ़ गई।

इसी अनुभव ने कई देशों को यह सोचने पर मजबूर किया कि ड्रोन से निपटने के लिए अलग और सस्ते समाधान विकसित करने होंगे।

भारत क्यों बदल रहा है रणनीति

भारत भी पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन गतिविधियों को लेकर सतर्क हुआ है। सीमा क्षेत्रों में छोटे ड्रोन के जरिए निगरानी और तस्करी जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।

इसी वजह से भारतीय वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब ऐसे हथियारों और प्रणालियों पर ध्यान दे रही हैं जो खास तौर पर ड्रोन को रोकने के लिए बनाए गए हों। इनमें इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान प्रणाली, निर्देशित ऊर्जा हथियार और कम लागत वाली मिसाइलें शामिल हो सकती हैं।

रूस के साथ नए विकल्पों पर चर्चा

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपने पारंपरिक रक्षा सहयोगी रूस के साथ भी ऐसे विकल्पों पर चर्चा कर रहा है, जिनसे ड्रोन हमलों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

रूस ने हाल के वर्षों में कई नई वायु रक्षा प्रणालियां और ड्रोन रोधी तकनीक विकसित की हैं। माना जा रहा है कि भारत इन विकल्पों का अध्ययन कर रहा है ताकि भविष्य की चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

बदलते युद्ध का नया चेहरा

आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बड़े लड़ाकू विमानों और टैंकों तक सीमित नहीं रह गया है। छोटे ड्रोन, साइबर तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता युद्ध के तरीके को तेजी से बदल रहे हैं।

इसी कारण दुनिया की सेनाएं अपनी रणनीति और हथियार प्रणाली को नए खतरों के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रही हैं।

ड्रोन तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने दुनिया भर की सेनाओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। महंगी वायु रक्षा प्रणालियों का उपयोग हर छोटे खतरे के लिए करना अब व्यवहारिक नहीं माना जा रहा। इसी वजह से भारत भी नई तकनीक और कम लागत वाले समाधानों की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ताकि भविष्य के युद्ध में बेहतर तैयारी की जा सके।

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