रसोई से रोजगार तक गैस संकट की मार: होटलों पर लटके ताले, फिर लौट सकते हैं लकड़ी-उपलों के दिन

नई दिल्ली :- देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की कमी की खबरों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इसका असर केवल घरों की रसोई तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे कारोबार और रोजगार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई शहरों और कस्बों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि कई उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुकिंग की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

 

बताया जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में बुकिंग व्यवस्था ठप पड़ने जैसी स्थिति बन गई है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके नाम पर बिना जानकारी के बुकिंग दर्ज हो चुकी है, जिससे असली उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। इससे लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ती जा रही है।

 

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे ढाबों, होटलों और खानपान से जुड़े कारोबार पर पड़ रहा है। कई जगहों पर होटल संचालकों को मजबूरी में अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़े हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। इससे न केवल उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है।

 

कुछ इलाकों में लोग वैकल्पिक ईंधन की ओर भी लौटते नजर आ रहे हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कई परिवार फिर से लकड़ी, उपले या अन्य पारंपरिक ईंधन का उपयोग करने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इस तरह के विकल्पों का उपयोग और बढ़ सकता है।

 

हालांकि संबंधित एजेंसियों का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के प्रयास जारी हैं और जल्द ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही गैस की बुकिंग करें।

 

फिलहाल गैस संकट की चर्चा आम लोगों के बीच तेजी से फैल रही है और हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं।

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