ईरान :- पश्चिम एशिया के प्रमुख देश ईरान में इन दिनों एक असामान्य स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। देश के सर्वोच्च नेता अली खमेनेई की मृत्यु को तेरह दिन बीत जाने के बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में जिज्ञासा और चर्चा को जन्म दे दिया है क्योंकि शिया परंपरा में किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसे यथासंभव जल्दी मिट्टी के हवाले करना धार्मिक कर्तव्य माना जाता है।
शिया मत के धार्मिक विद्वानों के अनुसार किसी भी मुसलमान के निधन के बाद उसे सम्मानपूर्वक दफनाया जाना चाहिए ताकि आत्मा को शांति मिल सके और धार्मिक रीति पूरी हो सके। यही कारण है कि आम तौर पर अंतिम संस्कार में देर नहीं की जाती। लेकिन इस मामले में लगातार हो रही देरी ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ जानकारों का मानना है कि इस देरी के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। सर्वोच्च नेता का पद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है इसलिए उनके अंतिम संस्कार से पहले कई स्तर पर तैयारियां और औपचारिकताएं पूरी की जा रही होंगी। देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोगों के अंतिम दर्शन के लिए आने की संभावना भी बताई जा रही है इसलिए सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।
दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अंतिम संस्कार को एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जा सकता है ताकि जनता अपने नेता को अंतिम विदाई दे सके। ऐसे अवसर पर देश के कई वरिष्ठ नेता और विदेशों से आने वाले प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं इसलिए समय तय करने में सावधानी बरती जा रही है।
फिलहाल पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि अंतिम संस्कार कब और किस स्थान पर किया जाएगा। लोगों में अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने की भावना प्रबल है और सभी इस ऐतिहासिक क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।