नई दिल्ली :- दुनिया भर में लोकेशन ट्रैकिंग के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सिस्टम जीपीएस अब नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीपीएस के सैटेलाइट सिग्नल अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं और इन्हें सस्ते जैमिंग डिवाइस से भी बाधित किया जा सकता है। इसी वजह से कई टेक कंपनियां और स्टार्टअप अब इसके विकल्प तलाशने में जुट गए हैं।
लोकेशन और नेविगेशन तकनीक आज स्मार्टफोन से लेकर विमानन और रक्षा तक कई क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में अगर जीपीएस सिग्नल बाधित होते हैं तो इसका असर कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर पड़ सकता है। इसी खतरे को देखते हुए नई तकनीकों पर तेजी से शोध किया जा रहा है।
रेडियो सिग्नल आधारित लोकेशन सिस्टम
पहला विकल्प रेडियो सिग्नल आधारित लोकेशन तकनीक है जिसमें जमीन पर लगे ट्रांसमीटर और रिसीवर के जरिए लोकेशन तय की जाती है। इस तकनीक में सैटेलाइट पर निर्भरता कम होती है और सिग्नल जैम होने की संभावना भी कम मानी जाती है।
सेंसर आधारित नेविगेशन तकनीक
दूसरा विकल्प सेंसर आधारित नेविगेशन है जिसे आईएनएस कहा जाता है। इसमें डिवाइस के अंदर लगे सेंसर और मोशन ट्रैकिंग तकनीक के जरिए दिशा और दूरी का अनुमान लगाया जाता है। यह तकनीक खासतौर पर विमानों और रक्षा क्षेत्र में पहले से इस्तेमाल की जा रही है।
क्वांटम नेविगेशन पर भी काम
तीसरी तकनीक क्वांटम आधारित नेविगेशन मानी जा रही है जिसे भविष्य की अत्याधुनिक तकनीक कहा जाता है। क्वांटम नेविगेशन में बेहद संवेदनशील सेंसर का उपयोग किया जाता है जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और गति के सूक्ष्म बदलाव को मापकर लोकेशन का पता लगा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन तकनीकों का विकास तेजी से होगा और संभव है कि भविष्य में जीपीएस के साथ साथ ये सिस्टम भी नेविगेशन के लिए बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाएं। इससे लोकेशन तकनीक अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकती है।