नई दिल्ली :- मिडिल ईस्ट में अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। इस युद्ध के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। इस स्थिति ने रूस जैसे बड़े तेल निर्यातक देश को अप्रत्याशित आर्थिक लाभ पहुंचाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब भी मध्य पूर्व में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में उछाल आता है क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया की बड़ी तेल आपूर्ति का केंद्र है। हाल के संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति में बाधा आई और बाजार में कीमतें ऊपर चली गईं। इससे रूस को अपने तेल को ऊंची कीमत पर बेचने का मौका मिला।
रिपोर्टों के मुताबिक रूस को तेल की कीमत बढ़ने से प्रतिदिन करीब 150 मिलियन डॉलर तक अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है। यदि कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो रूस को कुछ ही महीनों में अरबों डॉलर का अतिरिक्त लाभ हो सकता है।
इसके अलावा मध्य पूर्व से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई देशों ने रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है। खासकर एशिया के बड़े बाजार जैसे भारत और चीन ने रूसी तेल की मांग बढ़ा दी है ताकि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष से रूस को दोहरा फायदा मिल रहा है। पहला फायदा तेल की बढ़ी कीमतों से हो रहा है और दूसरा फायदा यह है कि वैश्विक राजनीति का ध्यान फिलहाल यूक्रेन युद्ध से हटकर मध्य पूर्व की ओर चला गया है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यह फायदा लंबे समय तक नहीं रह सकता। अगर युद्ध जल्दी खत्म हो गया या तेल की आपूर्ति सामान्य हो गई तो कीमतें फिर गिर सकती हैं। लेकिन फिलहाल के हालात में यह संघर्ष रूस के लिए सचमुच “आपदा में अवसर” बनता दिख रहा है।