वाशिंगटन (अमेरिका):- अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब 17 दिन का हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना था लेकिन अब तक उनका यह मकसद पूरा नहीं हो पाया है। अमेरिकी सेनाओं ने कई रणनीतिक हमले किए और ईरान की नौसेना को नुकसान पहुंचाया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान के पास अब भी अपनी स्थिति मजबूत करने की पूरी क्षमता है।
ईरान की सेना ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी तैयारियों को और बढ़ा दिया है। ईरान की सरकार ने अपने लोगों से संयम बनाए रखने और स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने का आह्वान किया है। अमेरिका के हमलों के बावजूद ईरान की सेना अपने ठिकानों को मजबूत कर रही है और जरूरी संसाधनों का प्रबंध कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है लेकिन ईरान की रणनीति अभी भी कई मोर्चों पर कारगर साबित हो रही है।
ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की कोशिशें तेज कर दी हैं। अमेरिका की नीतियां और हमले ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव डालने के लिए हैं। इसके बावजूद ईरान ने संकेत दिए हैं कि वे किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष में लंबी लड़ाई की संभावना है। ईरान ने अपनी सीमा सुरक्षा को और सख्त किया है और अमेरिकी सेना की गतिविधियों पर नजर रख रही है। दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बरकरार है और समाधान की दिशा में कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं।
इस स्थिति में दुनिया भर के नेताओं और वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन का सपना देखा था लेकिन अब स्थिति इस कदर जटिल हो गई है कि उसके पूरा होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।