1 अप्रैल से लागू होंगे नए आयकर नियम, बदलेंगे ये नियम, टैक्सपेयर्स के लिए जानना जरूरी

नई दिल्ली :- 1 अप्रैल 2026 से भारत में नए आयकर नियम लागू होने जा रहे हैं। ध्यान दें कि आपका प्रश्न “1 अप्रैल” का है, लेकिन वर्तमान जानकारी (मार्च 2026) के अनुसार, यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, न कि 2025 से। पुराना आयकर अधिनियम 1961 (64 वर्ष पुराना) खत्म हो जाएगा, और उसकी जगह आयकर अधिनियम 2025 (Income Tax Act, 2025) लेगा।

यह बदलाव मुख्य रूप से टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए है। टैक्स स्लैब और दरें ज्यादातर वही रहेंगी (कोई बड़ा बदलाव नहीं), लेकिन कई महत्वपूर्ण नियम बदलेंगे। टैक्सपेयर्स के लिए ये बदलाव जानना जरूरी है:

प्रमुख बदलाव (1 अप्रैल 2026 से)

टैक्स ईयर (Tax Year) की नई अवधारणा

पुराने सिस्टम में “वित्त वर्ष” (Financial Year) और “आकलन वर्ष” (Assessment Year) अलग-अलग थे, जिससे confusion होता था।

अब सिर्फ एक ही “टैक्स ईयर” होगा, जो 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलेगा।

इससे ITR भरना और टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा।

भाषा और प्रावधान सरल बनाए गए

कानून की भाषा आसान की गई है।

पुराने, अप्रचलित (obsolete) प्रावधान हटा दिए गए हैं।

कुल धाराओं की संख्या कम की गई है, और प्रावधानों को बेहतर तरीके से reorganize किया गया है।

मुकदमेबाजी कम करने के लिए अस्पष्टताएं दूर की गई हैं।

ITR फाइलिंग डेडलाइन में संभावित बदलाव/राहत

नए कानून के तहत ITR दाखिल करने की समय-सीमा में कुछ राहत मिल सकती है (कुछ स्रोतों में उल्लेख है कि deadlines आसान होंगी)।

ऑडिट वाले मामलों में 31 अक्टूबर या 30 नवंबर जैसी डेट्स प्रभावित हो सकती हैं।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

STT (Securities Transaction Tax) में बढ़ोतरी (खासकर F&O ट्रेडिंग पर)।

TCS (Tax Collected at Source) की दरों में संशोधन (कुछ मामलों में कमी या बदलाव)।

परक्विजिट्स (Perquisites) जैसे सैलरी से मिलने वाले घर, गाड़ी, रिटायरमेंट फंड, एम्प्लॉयर गिफ्ट्स आदि की वैल्यूएशन पर नए नियम (टैक्स लगेगा)।

वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो आदि) की परिभाषा स्पष्ट की गई है।

टैक्स स्लैब और छूट पर कोई बड़ा बदलाव नहीं

नए रिजीम में ₹12 लाख तक की आय पर प्रभावी रूप से जीरो टैक्स (रीबेट के साथ) जैसा पहले था, वही रहेगा।

पुराने रिजीम में छूट/डिडक्शन (80C, HRA आदि) वैकल्पिक रहेंगे।

सैलरीड लोगों के लिए डिफॉल्ट नया रिजीम ही रहेगा।

ये बदलाव मुख्य रूप से संरचनात्मक हैं, टैक्सपेयर्स की जेब पर सीधा बड़ा असर नहीं पड़ेगा (टैक्स रेट्स वही), लेकिन कंप्लायंस आसान होगा। अगर आप सैलरीड हैं, निवेश करते हैं या बिजनेस चलाते हैं, तो नए नियमों के तहत ITR फाइलिंग और प्लानिंग पहले से बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

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