लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- सरकारी स्कूलों में आयोजित कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा के एक प्रश्न को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा में पूछा गया सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
प्रश्न था कि वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है। इस सवाल को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि यह परोक्ष रूप से जातिगत सोच को बढ़ावा देता है और छात्रों के मन में गलत संदेश डाल सकता है।
कई अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को समानता और संवेदनशीलता सिखाना होना चाहिए न कि ऐसे प्रश्नों के जरिए किसी प्रकार की सामाजिक विभाजन की भावना पैदा करना। उनका मानना है कि इस तरह के सवाल बच्चों के मन पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसे प्रश्न पेपर में शामिल कैसे हो गए और क्या पेपर तैयार करने से पहले उसकी ठीक से समीक्षा नहीं की गई।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रश्नों को तैयार करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी भी वर्ग या समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
अब मांग की जा रही है कि इस मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए जाएं।