इजरायल :- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अपना क्रांतिकारी आयरन बीम लेजर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद यह सिस्टम अब युद्ध के मैदान में असली परीक्षा दे रहा है। इसे भारतीय शैली में जुगाड़ कहा जा रहा है क्योंकि यह कम खर्च में बड़े खतरे को नेस्तनाबूद कर देता है।
आयरन बीम उच्च ऊर्जा वाला डायरेक्टेड एनर्जी हथियार है जो ट्रक पर माउंटेड है। इसमें बड़ा गोलाकार लेंस लगा होता है जो १०० किलोवाट का सॉलिड स्टेट लेजर बीम फायर करता है। यह बीम अदृश्य होता है जो हवा में लक्ष्य को गर्म करके जलाता या कमजोर करके तबाह कर देता है। कोई मिसाइल या विस्फोटक नहीं इस्तेमाल होता इसलिए कोई धमाका नहीं दिखता बस लक्ष्य अचानक गायब हो जाता है।
सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है। पारंपरिक आयरन डोम सिस्टम में एक तमीर मिसाइल की कीमत लगभग ५० हजार डॉलर यानी करोड़ों रुपये होती है जबकि आयरन बीम से एक शॉट की लागत सिर्फ बिजली के खर्च में ३ से १० डॉलर यानी करीब २५० से ८०० रुपये आती है। यह अनंत शॉट्स दे सकता है क्योंकि गोला-बारूद खत्म नहीं होता बस पावर चाहिए। रिचार्ज तेज होता है और लगातार फायरिंग संभव है।
हिजबुल्लाह के रॉकेट ड्रोन मोर्टार और छोटी मिसाइलों को यह सिस्टम मिड-एयर में नष्ट कर रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि खतरा अचानक गायब हो जाता है जिससे दुश्मन को हैरानी होती है। यह आयरन डोम का पूरक है जो छोटी रेंज के लिए बेहतर काम करता है। हालांकि बादल धुंध धुआं या धूल में प्रभाव कम हो जाता है और रेंज सीमित है लेकिन कम खर्च और असीमित उपयोग इसे गेम चेंजर बनाता है।
इजरायल रक्षा मंत्रालय ने इसे ऑपरेशनल घोषित किया है और हाल के संघर्ष में पहली बार असल युद्ध में इस्तेमाल हुआ है। विकास में अरबों शेकेल खर्च हुए लेकिन प्रति इंटरसेप्शन खर्च न के बराबर होने से यह आर्थिक रूप से क्रांतिकारी है। दुश्मन महंगे हथियार दागता है और इजरायल सस्ते में रोक देता है।
यह तकनीक भविष्य के युद्ध बदल सकती है जहां लेजर डिफेंस मिसाइलों पर भारी पड़ सकती है। इजरायल की यह उपलब्धि वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के लिए नया अध्ययन बन गई है। अब मध्य पूर्व में सुरक्षा का नया दौर शुरू हो चुका है जहां जुगाड़ जैसी तकनीक बड़े खतरे को चुटकियों में खत्म कर रही है।