जौनपुर (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश के जौनपुर में नशीली दवाओं की अवैध तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अपर शस्त्र न्यायाधीश मो. शारिक सिद्दीकी की अदालत ने आरोपी देवेश कुमार निगम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मामला कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध आपूर्ति और करोड़ों रुपये के आर्थिक अपराध से जुड़ा हुआ है। कोतवाली थाने में ड्रग इंस्पेक्टर रजत कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार आरोपी की फर्म मेसर्स निगम मेडिकल एजेंसी के माध्यम से लगभग 21000 बोतल न्यू फेसिडिएल कफ सिरप की गैरकानूनी सप्लाई की गई थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खरीद और बिक्री को सही दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इनमें नकली रसीदें रबर स्टांप और जाली हस्ताक्षर शामिल थे। आरोपी ने रांची की एक फर्म से माल खरीदना दिखाया और उसे मिर्जापुर व चंदौली की फर्मों को बेचना दर्शाया लेकिन सत्यापन में ये सभी लेनदेन पूरी तरह फर्जी पाए गए।
अदालत में पेश रिपोर्ट के अनुसार इन दवाओं का उपयोग चिकित्सकीय उद्देश्यों के बजाय नशे के रूप में किया जा रहा था जिससे अवैध मुनाफा कमाया जा रहा था। कोर्ट ने केस डायरी और स्वतंत्र गवाहों के बयान का अवलोकन करने के बाद इसे गंभीर आर्थिक अपराध माना।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जहां अपराध की प्रकृति गंभीर हो और जांच प्रभावित होने की आशंका हो वहां अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।