क्यूबा में अंधकार का संकट : बिजली ठप होने से जीवन और व्यवस्था पर गहरा खतरा

क्यूबा :- क्यूब इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है जिसने पूरे देश को अंधेरे में धकेल दिया है। मार्च महीने में तीसरी बार देशव्यापी बिजली गुल होने से हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। लगभग एक करोड़ की आबादी वाले इस देश में सभी पंद्रह प्रांत पूरी तरह बिजली विहीन हो गए हैं जिससे जनजीवन ठप हो गया है।

बिजली कटौती का सबसे भयावह असर अस्पतालों पर पड़ा है जहां जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर मरीजों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई अस्पतालों में वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों की जान खतरे में पड़ गई क्योंकि बिजली आपूर्ति अचानक बंद हो गई। ऐसे हालात में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ चुकी हैं और जरूरी सर्जरी तक टालनी पड़ रही हैं।

इस संकट की जड़ में ईंधन की भारी कमी बताई जा रही है। क्यूबा के राष्ट्रपति पहले ही यह स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले तीन महीनों से देश को कोई तेल आपूर्ति नहीं मिली है। वर्तमान में देश अपनी जरूरत के मात्र चालीस प्रतिशत ईंधन पर चल रहा है जिससे बिजली उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी शीत भंडारण भी ठप हो रहा है जिससे चिकित्सा व्यवस्था और कमजोर पड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस स्थिति ने ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Russia द्वारा भेजे गए तेल टैंकर को अमेरिकी हस्तक्षेप के कारण क्यूबा तक नहीं पहुंचने दिया गया और उसे दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया। इसी तरह एक अन्य डीजल टैंकर को भी रोके जाने की खबरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने भू राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है और क्यूबा की ऊर्जा आपूर्ति को और जटिल बना दिया है।

क्यूबा मानवीय संकट के कगार पर खड़ा है। लगातार बिजली संकट के कारण अस्पतालों में नवजात शिशु डायलिसिस मरीज और अन्य गंभीर रोगियों की जिंदगी खतरे में है। बुनियादी सुविधाओं की कमी से आम नागरिकों का जीवन भी कठिन हो गया है और खाद्य आपूर्ति से लेकर पानी तक की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

यह स्थिति केवल एक ऊर्जा संकट नहीं बल्कि एक व्यापक मानवीय चुनौती के रूप में सामने आ रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है। क्यूबा के लोग इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां हर दिन अनिश्चितता और कठिनाइयों से भरा हुआ है और पूरी दुनिया की नजर अब इस संकट पर टिकी हुई है।

 

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