नई दिल्ली :- भारत निर्वाचन आयोग से जुड़े एक दस्तावेज के वायरल होने के बाद पैदा हुए विवाद पर अब आधिकारिक सफाई सामने आ गई है। आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह मामला पूरी तरह से एक क्लेरिकल गलती का परिणाम था जिसे तुरंत सुधार लिया गया।
स्पष्टीकरण में बताया गया कि भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई ने वर्ष 2019 के दिशा निर्देशों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। इस दौरान पार्टी ने एक पुरानी फोटोकॉपी दस्तावेज के रूप में जमा की थी जिस पर पार्टी की मुहर पहले से मौजूद थी।
कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई कि इसी दस्तावेज को गलती से बिना जांच के अन्य राजनीतिक दलों को भी भेज दिया गया। इस प्रक्रिया में मौजूद पार्टी मुहर पर ध्यान नहीं दिया जा सका और यही चूक विवाद का कारण बन गई।
जैसे ही यह त्रुटि सामने आई उसे तुरंत स्वीकार किया गया और 21 मार्च को उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा संबंधित दस्तावेज को वापस लेने के लिए औपचारिक पत्र जारी किया गया। यह सूचना सभी राजनीतिक दलों जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को भेज दी गई।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 2019 के दिशा निर्देशों में समय के साथ संशोधन हो चुका है और इसकी जानकारी पहले ही सभी दलों को दी जा चुकी है।
भारत निर्वाचन आयोग ने लोगों और मीडिया से अपील की है कि इस क्लेरिकल गलती के आधार पर भ्रामक खबरें न फैलाएं। आयोग ने भरोसा दिलाया कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू है।