नई दिल्ली :- सोशल मीडिया पर भारत निर्वाचन आयोग से जुड़ा एक कथित आधिकारिक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक राजनीतिक दल की मुहर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इस इमेज के सामने आने के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
वायरल दस्तावेज में 19 मार्च 2019 की तारीख का जिक्र है और इसमें चुनाव से जुड़े दिशा-निर्देशों तथा उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के खुलासे से संबंधित जानकारी दी गई है। यह पत्र राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को संबोधित बताया जा रहा है।
हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि दस्तावेज के निचले हिस्से में भारतीय जनता पार्टी की मुहर जैसी आकृति दिखाई दे रही है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। कई यूजर्स इसे लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर टिप्पणी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के वायरल दस्तावेजों की सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार पुराने दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर भ्रम फैलाया जाता है। अभी तक इस इमेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने आया है।
वायरल इमेज ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना जरूरी है।