नई दिल्ली :- हिंदी संगीत जगत में मोहम्मद रफी और किशोर कुमार का नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाता है। दोनों की गायकी का अंदाज बिल्कुल अलग था फिर भी दोनों का मकसद एक ही था दिलों को छू जाना। एक बार दोनों को एक ही कार्यक्रम में भजन गाने का मौका मिला।
रफी साहब ने अपनी मधुर और सुरभरी आवाज में भजन प्रस्तुत किया तो पूरा हॉल शांत हो गया। लेकिन जब किशोर दा मंच पर आए तो उन्होंने अपने अनोखे अंदाज में वही भावनाएं इस तरह गाईं कि दर्शक झूम उठे। उनकी आवाज में सरलता और भाव की गहराई इतनी थी कि लोग भावविभोर हो गए। उस दिन पहली बार यह महसूस हुआ कि गायकी केवल तकनीक का खेल नहीं बल्कि दिल से दिल तक पहुंचने की कला है। रफी साहब ने भी किशोर दा की प्रस्तुति के बाद उनकी तारीफ की और कहा कि संगीत का असली अर्थ भावनाओं को जगाना है। यह किस्सा आज भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और यह साबित करता है कि किशोर दा हर गीत को अपनी आत्मा से गाते थे।