नई दिल्ली :- देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। खबरों के मुताबिक, भारत के पास सिर्फ करीब 5 दिन का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) ही उपलब्ध है। इस मुद्दे पर पहले ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने चेतावनी दी थी।
क्या है पूरा मामला?
CAG की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत का रणनीतिक तेल भंडार अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुकाबले काफी कम है। किसी भी आपात स्थिति—जैसे युद्ध, सप्लाई चेन में बाधा या वैश्विक संकट—के दौरान यह भंडार बहुत सीमित समय तक ही देश की जरूरतें पूरी कर पाएगा।
क्यों है यह चिंता की बात?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अगर वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित होती है, तो देश को ईंधन संकट और कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने रणनीतिक तेल भंडार को बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम करने की जरूरत है। कई विकसित देशों के पास 60 से 90 दिनों तक का तेल भंडार होता है, जबकि भारत अभी इस मामले में काफी पीछे है।
सरकार के सामने चुनौती
सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वह तेल भंडारण क्षमता बढ़ाए और सप्लाई को सुरक्षित बनाए। इसके लिए नए स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर जोर दिया जा सकता है।CAG की चेतावनी के बाद सामने आई यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत देती है। आने वाले समय में इस दिशा में ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी होगा, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में देश को परेशानी का सामना न करना पड़े।