नई दिल्ली :- देश में रसोई गैस को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां हजारों उपभोक्ता अब पारंपरिक सिलेंडर की जगह पाइप के जरिए मिलने वाली गैस को अपनाने लगे हैं। हाल ही में करीब छह हजार उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन को छोड़ दिया है और पाइप प्राकृतिक गैस की ओर रुख किया है जिससे ऊर्जा खपत के तरीके में बदलाव साफ नजर आ रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने इस कदम को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि यह बदलाव न केवल सुविधा बढ़ाता है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर साबित हो सकता है। पाइप गैस के इस्तेमाल से सिलेंडर की झंझट खत्म होती है और लगातार गैस की उपलब्धता बनी रहती है जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।
गैस संकट के बीच सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की कमी से आम लोगों को परेशानी न हो। पाइप गैस का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है जिससे ज्यादा से ज्यादा घरों तक इसकी पहुंच बनाई जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार पाइप प्राकृतिक गैस सुरक्षित मानी जाती है और इसमें रिसाव का खतरा कम होता है साथ ही यह किफायती भी हो सकती है क्योंकि इसमें उपयोग के अनुसार बिल आता है। यही कारण है कि शहरी क्षेत्रों में इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है और लोग इसे बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
सरकार का फोकस अब ऊर्जा के स्वच्छ और आधुनिक साधनों को बढ़ावा देने पर है जिससे प्रदूषण कम किया जा सके और उपभोक्ताओं को सुविधाजनक विकल्प मिल सकें। आने वाले समय में पाइप गैस का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है जिससे रसोई गैस के उपयोग का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।