नई दिल्ली :- सरकार ने इंटरनेट से जुड़े सर्विलांस सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। नए नियमों के तहत ऐसे किसी भी उपकरण को मंजूरी नहीं दी जाएगी जिसमें चीनी चिपसेट का इस्तेमाल किया गया हो। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।जानकारी के अनुसार एक अप्रैल दो हजार छब्बीस से उन कंपनियों के कैमरों पर प्रतिबंध लग सकता है जिनके उपकरणों में संदिग्ध या प्रतिबंधित चिपसेट का उपयोग होता है।
सरकार का मानना है कि इंटरनेट से जुड़े कैमरे और निगरानी उपकरण संवेदनशील सूचनाओं को प्रोसेस करते हैं ऐसे में यदि इनमें सुरक्षा जोखिम हो तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इसी कारण अब केवल उन्हीं उपकरणों को अनुमति दी जाएगी जो तय मानकों और सुरक्षा जांच पर खरे उतरेंगे।
इस फैसले का असर बाजार और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ सकता है। कई संस्थान और लोग जो पहले से ऐसे उपकरण इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें अब वैकल्पिक विकल्पों की ओर जाना पड़ सकता है। साथ ही कंपनियों को भी अपने उत्पादों में बदलाव कर नए नियमों के अनुसार ढालना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगा और भविष्य में साइबर खतरों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि इससे बाजार में बदलाव और प्रतिस्पर्धा की स्थिति भी देखने को मिल सकती है क्योंकि नए नियमों के चलते कई कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी।