Health tips :- गर्भावस्था के पहले तीन महीने यानी पहली तिमाही में महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस होना आम बात है। मॉर्निंग सिकनेस का मतलब है सुबह-सवेरे उल्टी या मतली महसूस होना, लेकिन यह दिन में किसी भी समय हो सकता है। गायनोलॉजिस्ट के अनुसार, इसका मुख्य कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव हैं। गर्भावस्था के दौरान एचसीजी (Human Chorionic Gonadotropin) हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे मतली और उल्टी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा प्रोजेस्टेरोन हार्मोन भी पाचन तंत्र पर असर डालता है और भोजन की गति धीमी कर देता है, जिससे पेट में भारीपन और गैस की समस्या भी हो सकती है।
मॉर्निंग सिकनेस हर महिला में अलग-अलग तरीके से दिखती है। कुछ महिलाओं को हल्की सी मतली महसूस होती है, जबकि कुछ को लगातार उल्टी की परेशानी हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आम तौर पर यह समस्या गर्भावस्था के 6 से 12 हफ्ते के बीच सबसे अधिक बढ़ती है और 14 से 16 हफ्ते तक धीरे-धीरे कम होने लगती है। हालांकि, कुछ महिलाओं में यह समस्या पूरे पहले ट्राइमेस्टर तक बनी रहती है। इसके अलावा, खाली पेट रहने, थकान, तनाव या कुछ विशेष गंधों के संपर्क में आने पर मॉर्निंग सिकनेस और बढ़ सकती है।
इस समस्या से निपटने के लिए एक्सपर्ट कुछ सुझाव देते हैं। सुबह उठते ही हल्का नाश्ता करना जैसे क्रैकर्स या टोस्ट खाने से मतली कम हो सकती है। दिन में छोटे-छोटे और हल्के भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और तेज मसालेदार या भारी भोजन से बचना भी मददगार होता है। यदि मॉर्निंग सिकनेस बहुत ज्यादा हो और वजन घटने लगे या निर्जलीकरण जैसी समस्या आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। एक्सपर्ट कहते हैं कि सही खानपान, आराम और डॉक्टर की सलाह से अधिकांश महिलाओं में यह समस्या सुरक्षित तरीके से नियंत्रित हो सकती है और गर्भावस्था का अनुभव सहज बनता है।