Pancreatic cancer नई दिल्ली:- अग्नाशय कैंसर को चिकित्सा जगत में अक्सर “द कैंसर दैट व्हिस्पर्स” यानी ऐसा कैंसर कहा जाता है जो धीरे-धीरे बिना कोई स्पष्ट संकेत दिए शरीर में पनपता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी का सबसे बड़ा संकट यही है कि जब तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं तब तक यह अक्सर अपने उन्नत चरण में पहुँच चुका होता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि लोग इसके शुरुआती “रेड फ्लैग्स” को पहचान लें और समय रहते जांच करवा लें, तो उपचार की संभावना बेहतर हो सकती है। भारत में पैंक्रियाटिक कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। डॉक्टर बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खान-पान, धूम्रपान और मोटापा इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके बावजूद पैंक्रियास शरीर का वह हिस्सा है जो लक्षणों को लंबे समय तक छुपाए रखता है। यह ग्रंथि पेट के पीछे गहराई में स्थित होती है इसलिए शुरुआती ट्यूमर को आसानी से महसूस या देखा नहीं जा सकता।
डॉक्टरों ने बताए शुरुआती चेतावनी संकेत
हाल ही में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस “खामोश” कैंसर के शुरुआती संकेतों पर चर्चा की है और लोगों से आग्रह किया है कि वे इन्हें सामान्य समस्याओं की तरह अनदेखा न करें।
1. पेट और पीठ में लगातार दर्द
ऊपरी पेट में हल्का लेकिन लगातार दर्द, जो पीठ तक फैलने लगे, पैंक्रियाटिक कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह दर्द अक्सर खाने के बाद बढ़ जाता है और कई लोग इसे एसिडिटी या गैस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
2. बिना कारण वजन घटना
बिना किसी प्रयास के अचानक वजन कम होना, भूख न लगना या थोड़ी मात्रा में भोजन करने पर ही पेट भर जाने का एहसास—ये सभी संकेत पैंक्रियास के सही ढंग से काम न करने का संकेत देते हैं।
3. पीलिया (जॉन्डिस)
डॉक्टरों के अनुसार, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, गहरे रंग का मूत्र और हल्के रंग का मल तब दिखाई देता है जब कैंसर बाइल डक्ट पर दबाव डालने लगता है। कई बार यह पैंक्रियाटिक कैंसर का पहला स्पष्ट लक्षण होता है।
4. मल और पाचन में बदलाव
यदि पैंक्रियास पर्याप्त एंजाइम नहीं बना रहा, तो भोजन ठीक से पच नहीं पाता। इसका परिणाम है—फीका, चिपचिपा और तैरने वाला मल। इसे आमतौर पर लोग पाचन समस्या मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह गंभीर संकेत हो सकता है।
5. अचानक डायबिटीज का विकसित होना
कई विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक डायबिटीज का निदान होना या पहले से नियंत्रित शुगर का अचानक बिगड़ जाना भी पैंक्रियाटिक कैंसर का प्रारंभिक संकेत हो सकता है, क्योंकि पैंक्रियास इंसुलिन निर्माण का केंद्र होता है।
क्यों देर से पकड़ा जाता है यह कैंसर?
विशेषज्ञ कहते हैं कि पैंक्रियाटिक कैंसर का स्थान शरीर के भीतर इतनी गहराई में है कि सामान्य जांच से इसे पकड़ना कठिन होता है। इसके अलावा, शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं—जैसे गैस, बदहजमी, थकान—जो लगभग सभी लोग कभी-कभी अनुभव करते हैं। यही वजह है कि मरीज अक्सर महीनों तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते। भारत में अभी तक इसका कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है। केवल उच्च जोखिम वाले लोगों—जैसे जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास हो या जिन्हें पुराना पैन्क्रिएटाइटिस हो—की विशेष निगरानी की जाती है।
डॉक्टरों की अपील: जागरूकता ही बचाव है
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता है। यदि लोग शुरुआती बदलावों को पहचानकर समय पर जांच करवाएं, तो निदान जल्दी संभव है। उन्होंने धूम्रपान छोड़ने, सीमित मात्रा में शराब सेवन, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण को पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम घटाने में महत्वपूर्ण बताया।