No bail नई दिल्ली:- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया है कि यदि एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) के मामलों में छह महीने के भीतर मुकदमे की त्वरित सुनवाई होती है तो आरोपी को जमानत नहीं दी जाएगी। यह सुझाव न्यायालय ने एनआईए मामलों के लिए विशेष अदालतों की स्थापना की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है।सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम चाहते हैं कि इन अदालतों में दिन-रात काम ताकि एनआईए के मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।” उन्होंने कहा कि एनआईए राष्ट्रीय महत्व के मामलों की जांच करती है इसलिए इन मामलों में जमानत देने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से एनआईए मामलों के लिए विशेष अदालतों की स्थापना के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। न्यायालय ने कहा कि यदि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें विशेष अदालतों की स्थापना नहीं करती हैं तो अदालतें आरोपी को जमानत देने के लिए मजबूर होंगी। यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब एनआईए के मामलों में जमानत देने के लिए अदालतों में कई याचिकाएं लंबित हैं। एनआईए के मामलों में जमानत देने के लिए अदालतों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि ये मामले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होते हैं।