पटना (बिहार):- विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद राजद (RJD) के भीतर नेतृत्व, निर्णय और हस्तक्षेप को लेकर पहला बड़ा संदेश सामने आ गया है। सोमवार को पटना में आयोजित महागठबंधन की विस्तृत समीक्षा बैठक में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पहली बार स्पष्ट रूप से कहा कि वह पार्टी को परिवार आधारित हस्तक्षेप मॉडल में नहीं चलाना चाहते। बैठक में तेजस्वी ने दो टूक कहा, “मैं जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार हूं, लेकिन पार्टी में परिवार का दखल अब बर्दाश्त नहीं होगा।” यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब रोहिणी आचार्य-संजय यादव-परिवारिक मतभेद की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में हैं और पार्टी कैडर में भी असंतोष बढ़ रहा है।
बैठक की शुरुआत: तेजस्वी ने मना किया, लालू ने दबाव दिया
पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित बंद कमरे की बैठक में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती सहित सभी वरिष्ठ विधायक व केंद्रीय पदाधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक शुरू होते ही तेजस्वी यादव को फिर से विधायक दल का नेता बनाने का प्रस्ताव पास किया गया।
तेजस्वी ने तुरंत असहमति जताते हुए कहा, “मैं खुद को नेता के रूप में नहीं, कार्यकर्ता के तौर पर देखता हूं। मैं अभी कोई पद नहीं चाहता।” उनके इस जवाब से कुछ मिनट के लिए पूरा हॉल सन्नाटे में चला गया। लेकिन राजद प्रमुख लालू यादव ने इसे तुरंत खारिज करते हुए दोबारा प्रस्ताव रखा, और वहाँ मौजूद तमाम विधायकों ने हाथ खड़े कर समर्थन दिया। आखिरकार तेजस्वी को एक बार फिर RJD विधायक दल का नेता चुना गया।