श्रीनगर। Amarnath Yatra 2026 इस वर्ष केवल आस्था का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है। बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों से अब तक 4.5 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के आने के बावजूद यात्रा मार्गों पर करीब 300 मीट्रिक टन ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया है।
Amarnath Yatra 2026 में ‘स्वाहा मॉडल’ बना चर्चा का केंद्र
इस वर्ष Amarnath Yatra 2026 में कचरा प्रबंधन के लिए ‘स्वाहा मॉडल’ (SWAHA Model) अपनाया गया। इसके तहत यात्रा मार्गों पर उत्पन्न होने वाले ठोस और तरल कचरे का संग्रह, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया। इस मॉडल का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र को प्लास्टिक और प्रदूषण से बचाना है।
करीब 300 टन कचरे का हुआ वैज्ञानिक निस्तारण
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 30 जुलाई 2026 तक कुल 291.72 मीट्रिक टन ठोस कचरा एकत्र कर वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस किया गया।
- बालटाल मार्ग: 191.29 मीट्रिक टन
- पहलगाम मार्ग: 100.43 मीट्रिक टन
- केवल 30 जुलाई को ही लगभग 9 टन कचरा एकत्र किया गया।
Amarnath Yatra 2026 में प्लास्टिक मुक्त अभियान को मिली सफलता
यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए श्रद्धालुओं के बीच 1.10 लाख से अधिक पुनः उपयोग योग्य बैग वितरित किए गए। इसके अलावा ‘बर्तन बैंक’ और ‘सेवा कैफे’ जैसी पहल के जरिए सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने का प्रयास किया गया।
घोड़ों के जरिए पहाड़ों से नीचे लाया गया कचरा
Amarnath Yatra 2026 की सबसे अनोखी व्यवस्था यह रही कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से कचरे को नीचे लाने के लिए करीब 1,590 घोड़ों की मदद ली गई। इनके माध्यम से लगभग 80 मीट्रिक टन कचरा सुरक्षित रूप से नीचे लाकर उसका वैज्ञानिक निस्तारण किया गया।
98 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने की स्वच्छता व्यवस्था की सराहना
यात्रा के दौरान मोबाइल ऐप, वेबसाइट और डिजिटल कियोस्क के माध्यम से मिले 34 हजार से अधिक फीडबैक में 98 प्रतिशत से ज्यादा श्रद्धालुओं ने स्वच्छता और शौचालय व्यवस्था को उत्कृष्ट बताया। यह Amarnath Yatra 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
Amarnath Yatra 2026 बना देश के लिए मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि Amarnath Yatra 2026 ने यह साबित कर दिया कि लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रबंधन और जनसहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है।