Rahul Gandhi: 7 साल पुराने मानहानि केस में फंसे राहुल, सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए 6 हफ्ते की मोहलत

Rahul Gandhi (मुंबई):- कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने 2018 के ‘चौकीदार चोर है’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ वाले बयान पर चल रहे मानहानि केस को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत के समन में कोई अवैधता नहीं है और अब इस मामले में ट्रायल होगा।हालांकि कोर्ट ने राहुल गांधी को तुरंत राहत देते हुए ट्रायल पर 6 हफ्ते की रोक बरकरार रखी है, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

Rahul Gandhi: क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2018 का है। लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान में एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था – ‘चौकीदार चोर है’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ यानी चोरों का सरदार। इसी का वीडियो उन्होंने अपने X अकाउंट पर भी शेयर किया था। इसके खिलाफ मुंबई के गिरगांव में रहने वाले बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने 2019 में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज की। शिकायत में कहा गया कि राहुल के इस बयान से न सिर्फ पीएम मोदी बल्कि पूरी बीजेपी और उसके करोड़ों कार्यकर्ताओं की छवि खराब हुई है। उनकी शिकायत पर मजिस्ट्रेट ने 28 अगस्त 2019 को राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। यह समन राहुल को 2021 में मिला, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में CrPC की धारा 482 के तहत केस रद्द कराने की याचिका दायर की थी। 2021 से ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा रखी थी।

Rahul Gandhi : कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

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राहुल गांधी के वकील सुदीप पासबोला ने तर्क दिया कि शिकायत सुनवाई योग्य ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल ने अपने बयान में किसी पार्टी का नाम नहीं लिया था, इसलिए कोई ‘पहचान योग्य वर्ग’ पीड़ित नहीं है। IPC की धारा 499 और CrPC की धारा 199 के तहत कोई राजनीतिक पार्टी मानहानि की शिकायतकर्ता नहीं हो सकती। शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमाल सिर्फ राजनीतिक एजेंडे के तहत केस कर रहे हैं।

वहीं महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे और शिकायतकर्ता के वकील रोहन महाडिक ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक पंजीकृत राष्ट्रीय पार्टी है और वह एक पहचान योग्य संस्था है। शिकायतकर्ता 20 साल से सक्रिय सदस्य है। पीएम मोदी बीजेपी के ही सदस्य हैं, ऐसे में ‘कमांडर-इन-थीफ’ कहना पूरी पार्टी पर चोरी का आरोप है।

Rahul Gandhi : कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस बोरकर ने राहुल की दलील खारिज करते हुए कहा, “बीजेपी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए वह निश्चित रूप से एक पहचान योग्य संस्था है। पहली नजर में यह नहीं कहा जा सकता कि विवादित टिप्पणी केवल पार्टी के सीनियर लीडरशिप तक सीमित है। इसका वास्तविक आशय क्या था, यह ट्रायल में तय होगा। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई खामी नहीं है।

अब 6 हफ्ते बाद अगर सुप्रीम कोर्ट से रोक नहीं मिली तो राहुल गांधी को मुंबई की गिरगांव कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है, जबकि बीजेपी ने कहा है कि राहुल गांधी को अपने बयानों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

https://youtu.be/5wiKHm5eUKk?si=qy_sLRVBONW7Qswx

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