US Tariff: रूस पर प्रतिबंधों को लेकर भारत का दो टूक रुख, कीर्ति वर्धन सिंह बोले- दबाव में नहीं लेंगे फैसला

US Tariff: रूस पर प्रतिबंधों के बीच भारत ने स्पष्ट किया अपना रुख

US Tariff (नई दिल्ली): रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और रूसी ऊर्जा की खरीद को लेकर भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दोहराया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत किसी बाहरी दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसले नहीं करेगा। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और देश के नागरिकों के हित को सरकार की प्राथमिकताओं में बताया।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और टैरिफ लगाने से संबंधित कानून को लेकर चर्चा तेज है। अमेरिकी कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर राष्ट्रपति को अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह प्रावधान अपने आप कोई 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है।

US Tariff: राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की बात

कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र तरीके से संचालित करता है और किसी दूसरे देश के कहने पर किसी गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले करता है। उन्होंने देश और नागरिकों की आर्थिक मजबूती तथा स्थिरता को सरकार की प्राथमिकता बताया।

विदेश राज्य मंत्री ने आयात शुल्क के मुद्दे पर भी भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अनुचित तरीके से लगाए जाने वाले टैरिफ स्वीकार्य नहीं हैं। उनका कहना था कि भारत दबाव में आकर अपने फैसले नहीं बदलेगा।

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US Tariff: ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का जोर

भारत के लिए रूसी तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों का मुद्दा केवल विदेश नीति से ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए आपूर्ति के स्रोतों का चयन व्यावसायिक व्यवहार्यता, कीमत और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि भारत अपनी 1.4 अरब से अधिक आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा की खरीद जारी रखेगा। इसके लिए बदलती बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।

US Tariff: अमेरिका के साथ संबंधों पर भी नजर

अमेरिका में रूस पर प्रतिबंधों से संबंधित प्रस्तावों के बीच भारत ने संकेत दिया है कि ऐसे कदमों का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में संबंधित विधेयक पारित होने के बाद भारत की ओर से ऊर्जा सुरक्षा और संभावित आर्थिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की गई थी।

फिलहाल भारत का आधिकारिक रुख यही है कि ऊर्जा खरीद और विदेश नीति से जुड़े फैसले देश के राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए जाएंगे। वहीं, अमेरिका में पारित संबंधित कानून के आगे की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट होंगे।

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