महाराष्ट्र राजनीति: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने Cockroach Janata Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया दी है। आठवले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिपके की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए उनसे माफी मांगने की अपील की।
रामदास आठवले ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन नेताओं के खिलाफ टिप्पणी करते समय भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने दिपके की बयानबाजी को लेकर अपनी असहमति जताई और कहा कि इस तरह की भाषा उचित नहीं है।
यह विवाद मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए CJP के प्रदर्शन के बाद सामने आया। प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कई राजनीतिक टिप्पणियां की थीं। उनके बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र राजनीति: आठवले ने दिपके द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू के संदर्भ में की गई टिप्पणी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का देश के निर्माण और संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि अगर CJP और उसके समर्थक किसी राजनीतिक दल के साथ जाना चाहते हैं या किसी राजनीतिक मुद्दे पर सरकार का विरोध करना चाहते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उन्हें अपनी राजनीतिक बात रखने का अधिकार है। हालांकि, उनके अनुसार विरोध और राजनीतिक असहमति व्यक्त करते समय भाषा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
महाराष्ट्र राजनीति: आठवले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ दिपके की टिप्पणियों पर भी विरोध जताया। उन्होंने कहा कि वह दिपके के बयानों से सहमत नहीं हैं और उनसे अपने शब्दों पर पुनर्विचार करने तथा माफी मांगने की अपील करते हैं।
अभिजीत दिपके की ओर से CJP की ओर से चुनाव आयोग और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। इससे पहले भी रामदास आठवले ने CJP और दिपके की गतिविधियों पर राजनीतिक टिप्पणी की थी। सितंबर में उन्होंने CJP के नाम को लेकर भी तंज कसा था।
पूरे मामले में दोनों पक्षों के राजनीतिक विचार और बयान सामने आए हैं। ऐसे में दिपके के बयानों तथा आठवले की प्रतिक्रिया को संबंधित नेताओं के राजनीतिक वक्तव्य के तौर पर देखा जा रहा है।