SIR (नई दिल्ली): चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में संशोधन को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को पार्टी की तीन प्रमुख मांगों को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने इन्हें कांग्रेस की ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसी मांगें बताया, जिन पर पार्टी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने और चुनावों में बैलेट पेपर की व्यवस्था वापस लाने की मांग शामिल है।
खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के सहयोगी इन मुद्दों को लेकर देशभर में विरोध कर रहे हैं। उन्होंने नागरिक समाज संगठनों और युवा संगठनों के आंदोलनों के प्रति भी समर्थन जताया। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
SIR: CEC के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस की पहली प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में हो रहे बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। खरगे ने इससे पहले भी CEC को हटाने की मांग की थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों और प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
SIR रद्द करने की मांग
कांग्रेस की दूसरी मांग विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस ने मतदाता सूची में जोड़े गए, हटाए गए या संशोधित नामों की जानकारी सार्वजनिक करने और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें जानकारी तथा अपील का अवसर देने की मांग भी उठाई है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
तीसरी मांग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की है। खरगे और विपक्षी दल इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे से जोड़ रहे हैं। हाल के दिनों में INDIA गठबंधन और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं।
इस बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अपने पक्ष में कहा है कि प्रक्रिया का उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना और पात्र मतदाताओं की सूची को अधिक सटीक बनाना है। SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और आयोग के जवाब के बीच राजनीतिक बहस जारी है।