42 Former Judges:नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच 42 पूर्व न्यायाधीशों ने एक खुला पत्र जारी किया है। 7 अक्टूबर 2026 को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर चिंता जताई। पूर्व न्यायाधीशों ने बिना ठोस सबूत के लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों पर भी सवाल
‘संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार, बदनाम करना नहीं’
42 Former Judges:पूर्व न्यायाधीशों ने अपने पत्र में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उन्हें लगातार बदनाम करना उचित नहीं है। पत्र में कहा गया, “संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्हें बदनाम करना नहीं।”
उन्होंने आगाह किया कि संवैधानिक अधिकारियों को बार-बार ‘चोर’, ‘कठपुतली’ या ‘मिलीभगत वाला’ बताने से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है। उनके मुताबिक, चुनाव से जुड़े विवादों को प्रमाण और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर उठाया जाना चाहिए।
SIR प्रक्रिया का किया बचाव
42 Former Judges:पत्र में पूर्व न्यायाधीशों ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का भी समर्थन किया। उन्होंने इसे मतदाता सूची को साफ, सटीक और अद्यतन रखने के उद्देश्य से की जाने वाली कानूनी प्रक्रिया बताया।
पूर्व जजों ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 21(3) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने राजनीतिक दलों से चुनावी प्रक्रिया को अवैध ठहराने के बजाय अपनी शिकायतें निर्धारित कानूनी और संवैधानिक माध्यमों से उठाने की अपील की।
विपक्ष के प्रदर्शन के बीच आया पत्र
42 Former Judges:यह पत्र ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया के संचालन को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। वहीं, चुनाव आयोग और बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। <Cite refs={[“turn504857search5″,”turn504857news8”]}/>
इस विवाद में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के अधिकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। इसलिए SIR को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कानूनी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
मीडिया और राजनीतिक दलों से भी की अपील
42 Former Judges:पूर्व न्यायाधीशों ने राजनीतिक दलों से चुनावी शिकायतों को स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए उठाने की अपील की। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि बिना जांचे-परखे दावों और अटकलों को तथ्य की तरह प्रस्तुत न किया जाए।
पत्र में संवैधानिक संस्थाओं से पारदर्शिता बनाए रखने और राजनीतिक विवादों से ऊपर रहकर काम करने की अपेक्षा भी जताई गई।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बहस
42 Former Judges:42 पूर्व न्यायाधीशों का यह पत्र चुनाव आयोग की भूमिका और SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। जहां हस्ताक्षरकर्ताओं ने बिना प्रमाण के लगाए जाने वाले आरोपों से संस्थाओं पर जनता का भरोसा प्रभावित होने की आशंका जताई है, वहीं विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहा है।
इस पूरे विवाद में मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित की जाए, पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा कैसे हो और चुनाव से जुड़े आरोपों की जांच पारदर्शी तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत कैसे की जाए।