Emotional Intelligence Study: महिलाओं को दूसरों के दिल की बात समझने में महारत, पुरुष खुद की भावनाएं संभालने में आगे: बड़ी रिसर्च में खुलासा

Emotional Intelligence Study: (नई दिल्ली।) क्या महिलाएं दूसरों की भावनाओं को पुरुषों से बेहतर समझती हैं और क्या पुरुष अपनी भावनाओं को संभालने में आगे होते हैं? भावनात्मक समझ यानी इमोशनल इंटेलिजेंस पर किए गए एक बड़े अध्ययन में इन सवालों को लेकर दिलचस्प निष्कर्ष सामने आए हैं। रिसर्च के मुताबिक, महिलाएं औसतन दूसरे लोगों की भावनाओं को पहचानने और समझने में बेहतर प्रदर्शन करती हैं, जबकि पुरुष अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने से जुड़े कुछ आकलनों में थोड़ा आगे नजर आते हैं।

यह अध्ययन भावनात्मक बुद्धिमत्ता को केवल एक सामान्य क्षमता मानने के बजाय उसके अलग-अलग पहलुओं पर ध्यान देता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दूसरों की भावनाओं को समझना और अपनी भावनाओं को संभालना अलग-अलग कौशल हैं। इसलिए किसी एक नतीजे के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि सभी महिलाएं या सभी पुरुष भावनात्मक रूप से एक जैसे होते हैं।

6 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण

Emotional Intelligence Study: इस अध्ययन में 76 देशों के 6,09,278 लोगों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने 1,279 अकादमिक लेखों और उनसे संबंधित नमूनों की समीक्षा की। इसमें 1990 के दशक के मध्य से लेकर 2023 के अंत तक प्रकाशित और अप्रकाशित शोध शामिल किए गए।

अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता के अलग-अलग पहलुओं में महिलाओं और पुरुषों के औसत प्रदर्शन में कितना अंतर दिखाई देता है। निष्कर्ष बताते हैं कि भावनाओं को पहचानने और समझने में महिलाओं की औसत बढ़त अधिक स्पष्ट है, लेकिन भावनाओं को नियंत्रित करने के मामले में तस्वीर इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को संभाल रहा है या दूसरों की।

दूसरों की भावनाएं समझने में महिलाएं क्यों आगे दिखीं?

Emotional Intelligence Study: रिसर्च में महिलाओं और लड़कियों ने दूसरों की भावनाओं को पहचानने और समझने से जुड़े कई आकलनों में औसतन बेहतर प्रदर्शन किया। इसका संबंध इस क्षमता से है कि कोई व्यक्ति सामने वाले के चेहरे, व्यवहार या बातचीत से उसके भावनात्मक अनुभव को कितना समझ पाता है।

Emotional Intelligence Study: उदाहरण के तौर पर, किसी सहकर्मी की परेशानी पहचानना, दोस्त के तनाव को समझना या बातचीत के दौरान दूसरे व्यक्ति की भावनाओं का अंदाजा लगाना इसी तरह के कौशल से जुड़ा है।

हालांकि, अध्ययन यह साबित नहीं करता कि यह अंतर केवल जैविक कारणों से पैदा होता है। सामाजिक वातावरण, बचपन में भावनाओं को व्यक्त करने के अवसर और लोगों से जुड़ी अपेक्षाएं भी संभावित भूमिका निभा सकती हैं। शोध के आधार पर इन सभी कारणों में से किसी एक को निर्णायक नहीं माना जा सकता।

अपनी भावनाओं को संभालने में पुरुषों को मिली थोड़ी बढ़त

Emotional Intelligence Study: अध्ययन का दूसरा अहम निष्कर्ष अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने से जुड़ा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जब आकलन का विषय अपनी भावनाओं को संभालना होता है, तो पुरुषों और लड़कों का औसत प्रदर्शन थोड़ा बेहतर दिखाई देता है।

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भावनाओं को नियंत्रित करने का अर्थ उन्हें पूरी तरह दबा देना नहीं है। इसमें तनाव या निराशा के दौरान अपनी प्रतिक्रिया को समझना, आवेग में निर्णय लेने से बचना और परिस्थिति के अनुसार व्यवहार करना शामिल हो सकता है।

Emotional Intelligence Study: दूसरी ओर, दूसरों की भावनाओं को संभालने या उन्हें भावनात्मक सहयोग देने से जुड़े आकलनों में महिलाओं की औसत बढ़त देखी गई। इस तरह अध्ययन बताता है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता के अलग-अलग हिस्सों में परिणाम अलग हो सकते हैं।

क्या महिलाएं पुरुषों से ज्यादा इमोशनल इंटेलिजेंट होती हैं?

Emotional Intelligence Study: इस सवाल का जवाब अध्ययन में पूरी तरह सीधा नहीं है। शोध में महिलाओं की औसत बढ़त कई भावनात्मक क्षमताओं में दिखाई दी, लेकिन अंतर का आकार इस बात पर निर्भर करता है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता को कैसे मापा गया।

जब लोगों को वास्तविक कार्यों या परीक्षणों के जरिए अपनी क्षमता दिखानी होती है, तब महिलाओं की बढ़त अपेक्षाकृत अधिक नजर आती है। इसके मुकाबले, जब लोगों से अपनी ही क्षमता का आकलन करने को कहा जाता है, तो अंतर छोटा दिखाई देता है।

Emotional Intelligence Study: इसलिए शोधकर्ताओं का जोर इस बात पर है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता को एक ही पैमाने पर नहीं समझना चाहिए। किसी व्यक्ति की क्षमता उसके अनुभव, परिस्थितियों और संबंधित कौशल के आधार पर अलग हो सकती है।

बचपन और सामाजिक माहौल भी निभा सकते हैं भूमिका

Emotional Intelligence Study: अध्ययन में समय के साथ भावनात्मक बुद्धिमत्ता में लैंगिक अंतर के बदलते रुझानों पर भी ध्यान दिया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ अंतर हाल के वर्षों में कम हुए हैं और यह बदलाव बच्चों के समूहों में विशेष रूप से दिखाई देता है।

यह रुझान इस संभावना से मेल खाता है कि बच्चों को भावनाएं व्यक्त करने और दूसरों की भावनाओं को समझने के अलग-अलग अवसर दिए जाने से उनकी क्षमताओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अध्ययन इन बदलावों का कोई एक निश्चित कारण साबित नहीं करता और जैविक कारणों की भूमिका को पूरी तरह खारिज भी नहीं करता।

नौकरी और रिश्तों में क्यों महत्वपूर्ण है भावनात्मक समझ?

Emotional Intelligence Study: भावनात्मक बुद्धिमत्ता का संबंध संवाद, तनाव से निपटने और आपसी मतभेदों को सुलझाने जैसे कौशलों से हो सकता है। कार्यस्थल पर दूसरों की परेशानी समझना, टीम के बीच तनाव कम करना और मुश्किल बातचीत को संभालना उपयोगी क्षमताएं हैं।

लेकिन दूसरों की भावनाओं को संभालने की जिम्मेदारी हमेशा महिलाओं पर डालना भी उचित नहीं है। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष इस बात पर ध्यान देने की जरूरत दिखाते हैं कि भावनात्मक कौशल विकसित किए जा सकते हैं और इन्हें सभी लोगों को सीखने का अवसर मिलना चाहिए।

निष्कर्ष

Emotional Intelligence Study: भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर हुई यह बड़ी रिसर्च बताती है कि महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर को केवल एक सामान्य धारणा के आधार पर नहीं समझा जा सकता। महिलाएं औसतन दूसरों की भावनाओं को पहचानने और समझने में बेहतर स्कोर करती हैं, जबकि पुरुष अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने से जुड़े कुछ आकलनों में थोड़ा आगे दिखाई देते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये समूहों के औसत परिणाम हैं, किसी व्यक्ति की क्षमता का अंतिम फैसला नहीं। भावनात्मक समझ और आत्म-नियंत्रण ऐसे कौशल हैं, जिन्हें अभ्यास और अनुभव के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है।

 

स्रोत: PTI की रिपोर्ट; अध्ययन Emotion जर्नल में प्रकाशित मेटा-विश्लेषण पर आधारित है।

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